उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के बुढ़ाना क्षेत्र में शनिवार (8 नवंबर) को एक दर्दनाक घटना सामने आई. डीएवी पीजी डिग्री कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष के छात्र उज्जवल राणा (24) ने 7,000 रुपए की बकाया फीस के कारण परीक्षा देने की अनुमति न मिलने पर कॉलेज परिसर में पेट्रोल छिड़ककर खुद को आग लगा ली. अचानक हुई इस घटना से कॉलेज में अफरा-तफरी मच गई. साथी छात्रों ने अपने बैग और पानी की बोतलों की मदद से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उज्जवल गंभीर रूप से झुलस चुका था.

सूचना मिलते ही बुढ़ाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायल छात्र को अस्पताल ले जाया गया. उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया. फिलहाल छात्र की स्थिति नाजुक बताई जा रही है. छात्र उज्जवल राणा ने घटना से पहले एक वीडियो वायरल कर कॉलेज के प्रिंसिपल प्रदीप कुमार सिंह पर मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे. उज्जवल ने कहा था कि यदि उसे कुछ होता है, तो इसके लिए कॉलेज प्रिंसिपल और कुछ पुलिसकर्मी जिम्मेदार होंगे. साथी छात्रों और परिजनों का कहना है कि 5,250 रुपए की बकाया फीस के कारण कॉलेज प्रशासन उसे बार-बार अपमानित कर रहा था.

प्रिंसिपल प्रदीप कुमार सिंह ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि, ‘छात्र ने केवल 1,750 रुपए फीस जमा की थी और नियमित रूप से कॉलेज नहीं आता था. उसके पास 25,000 रुपये का मोबाइल है और वह रोजाना मोटरसाइकिल से कॉलेज आता है, जिसमें ईंधन की खपत होती है और इसकी कीमत कम से कम 1 लाख रुपये है. उसे गरीब या दलित पृष्ठभूमि से कैसे माना जा सकता है? यदि वह वास्तव में भुगतान करने में असमर्थ है, तो सरकार के पास ऐसे छात्रों के लिए प्रावधान और छात्रवृत्ति हैं. यदि वह गरीब है, तो उसने छात्रवृत्ति फॉर्म क्यों नहीं भरा?’ घटना के बाद छात्रों ने कॉलेज गेट पर धरना देकर प्रिंसिपल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और प्रिंसिपल के खिलाफ बीएनएस की धारा 351(3) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. साथ ही सुसाइड नोट में नामजद तीन पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

















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