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किसानों की समस्याओं पर आधारित अनुसंधान करने की जरूरत : कुलपति

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में अनुसंधान परिषद खरीफ 2025 में वैज्ञानिकों ने विभिन्न विषयों पर 70 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं की प्रगति को प्रस्तुत किया. कुलपति डॉ. पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय किसानों की समस्याओं पर आधारित अनुसंधान करने का प्रयास कर रहा है. पिछले दो वर्षों में जिन अनुसंधान परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है वे सभी किसानों की प्रत्यक्ष समस्याओं पर आधारित है. उन्होंने वैज्ञानिकों को उनके बेहतर कार्यों के लिए बधाई दी.

उन्होंने कहा प्रधानमंत्री का सपना देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने का है, इसमें कृषि वैज्ञानिकों की अहम भूमिका है. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को समझना होगा कि वे पूरी दुनिया के सबसे बेहतरीन वैज्ञानिक हैं और उसी सोच के साथ अनुसंधान करें. उन्होंने कहा कि जब हमारे एटीट्यूड में परिवर्तन आता है तो व्यवहार और कार्य में भी परिलक्षित होता है.उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहा है, लेकिन वे चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विश्वविद्यालय अपना छाप छोड़े.

नवसारी कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एआर पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालय ने पिछले दो वर्षों में ड्रोन तकनीक, फिशरीज एवं अन्य क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के रिसर्च पेपर को कई विदेशी वैज्ञानिकों ने भी अपने अनुसंधान में उपयोग किया है, यह गौरव की बात है. उन्होंने वैज्ञानिकों की विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं की गहन समीक्षा की और कई सुझाव दिये.

भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के निदेशक डॉ. जीपी दीक्षित ने दलहन के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की अनुसंधान परियोजनाओं की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को अरहर में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए अनुसंधान करना चाहिए, जिससे कि आधी कटोरी दाल से ही प्रोटीन की समुचित मात्रा मिल जाये.

भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद की निदेशक डॉ. सी तारा सत्यवती ने कहा कि विश्वविद्यालय में श्री अन्न से संबंधित विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं में अच्छा कार्य हो रहा है. उन्होंने कहा कि सामा, कोदो तथा अन्य श्री अन्न के जीन से संबंधित जो अनुसंधान चल रहे हैं वे आने वाले समय में किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होंगे.  निदेशक अनुसंधान डॉ. एके सिंह ने कहा कि दो दिनों तक चले इस अनुसंधान परिषद की बैठक में सत्तर से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं की बाह्य विशेषज्ञों द्वारा गहन समीक्षा की गयी. उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त ग्यारह नये अनुसंधान परियोजना स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया गया. जिसमें से कुछ को स्वीकार कर लिया गया और चार अनुसंधान परियोजनाओं को विभिन्न बदलावों के साथ अगले बैठक में प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है.

कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन डॉ. मुकेश कुमार ने किया. जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस के ठाकुर ने किया. कार्यक्रम के दौरान निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. मयंक राय, डीन बेसिक साइंस डॉ. अमरेश चंद्रा, डीन इंजीनियरिंग डॉक्टर राम सुरेश वर्मा, डीन फिशरीज डॉ. पी पी श्रीवास्तव, पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. राकेश मणि शर्मा, डॉ. शिवपूजन सिंह, डॉ. महेश कुमार समेत विभिन्न शिक्षक एवं वैज्ञानिक मौजूद थे.

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