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भारत पाकिस्तान में तनाव, स्मार्ट फोन चलाने वाले ऐसा करने से बचें

भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. इसके तहत पाकिस्तान और POK के कुछ इलाकों में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की गई. इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया या दुस्साहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

ऐसे हालात में देश की सीमाओं की सुरक्षा को लेकर हमारी सेनाएं पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद हैं. यदि आप स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं, तो यह जरूरी है कि आप भी कुछ जरूरी सावधानियां अपनाएं.

भारतीय सेना के एक प्रतिष्ठित पूर्व अधिकारी और लेखक, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने देशवासियों से आग्रह किया था कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी सैन्य टुकड़ी या सैन्य वाहनों की तस्वीरें या वीडियो साझा न करें. इसी तरह की अपील कई मीडिया संस्थानों द्वारा भी की गई है. आज के समय में, जब लगभग हर व्यक्ति के पास स्मार्टफोन होता है, ऐसे में नागरिकों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने आसपास हो रही किसी भी सैन्य गतिविधि को रिकॉर्ड कर उसे ऑनलाइन साझा न करें.

यदि युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो पाकिस्तान साइबर हमलों की रफ्तार बढ़ा सकता है. ऐसे हालात में किसी भी अनजान नंबर से आने वाले मैसेज या लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए. ऐसे लिंक या मैसेज में वायरस या ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर छिपा हो सकता है. इनका मकसद आपके मोबाइल फोन को हैक करना या आपकी बैंकिंग जानकारी चुराना हो सकता है.

सोशल मीडिया पर झूठी जानकारियां बहुत तेजी से फैलती हैं. तनावपूर्ण हालातों में ये अफवाहें हलचल और घबराहट का कारण बन सकती हैं. ऐसे में किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता को ऑनलाइन जांचना जरूरी है. ऐसा करके आप सरकार को बेवजह की अफरा-तफरी से निपटने की स्थिति में आने से बचा सकते हैं. इन प्रयासों का असल उद्देश्य समाज में डर और भ्रम का माहौल बनाना होता है.

स्मार्टफोन में GPS लोकेशन चालू रहने पर आपकी गतिविधियों को रियल-टाइम में ट्रैक किया जा सकता है. इस तकनीक का इस्तेमाल कर कोई भी आपकी सटीक लोकेशन का पता लगा सकता है. इसलिए, संकट या संवेदनशील परिस्थितियों में फोन की लोकेशन सेटिंग्स को बंद रखना सुरक्षित रहता है.

तनावपूर्ण हालात में सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक जानकारी या प्रोपेगेंडा तेजी से फैलने लगते हैं. ऐसी स्थिति में आप सत्य और प्रमाणिक सोर्स से जानकारी जुटाकर उन भ्रामक दावों की सच्चाई सामने ला सकते हैं. उद्देश्य यह होना चाहिए कि लोगों को तथ्यात्मक जानकारी देकर प्रोपेगेंडा का पर्दाफाश किया जाए, न कि किसी व्यक्ति विशेष से विवाद में उलझा जाए.

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