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रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन सीताकुंड धाम में जलेंगे घी के 51 हजार दीपक, भक्तों में उत्साह

अयोध्या में 22 जनवरी को होनेवाली भगवान राम की प्राण-प्रतिष्ठा का उत्साह पूर्वी चंपारण के पौराणिक स्थल सीताकुंड धाम में भी दिख रहा है। भगवान राम और माता सीता के रात्रि विश्राम का गवाह सीताकुंड धाम के लोग इस अवसर को खास बनाने की तैयारी में जुटे हैं। प्राण प्रतिष्ठा के दिन सीताकुंडधाम और आसपास के क्षेत्र में घी के 51 हजार दीये जलाने की तैयारी है। मधुबन बेदिवन पंचायत के पूर्व मुखिया रामकुमार तिवारी व पिपरा के व्यवसायी सोनू जायसवाल ने बताया कि आगामी 10 जनवरी को सीताकुंड धाम परिसर में एक सभा का आयोजन होगा। इसमें सियाराम दीपावली मनाने के साथ-साथ अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की रूपरेखा बनाई जाएगी।

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पूर्व मुखिया रामकुमार तिवारी आयोजन की तैयारी के लिए जनसंपर्क कर रहे हैं। वहीं, चिंतामणपुर पंचायत के पूर्व मुखिया ललन प्रसाद, बाबू टोला गांव के सुग्रीव सिंह, पिपरा के व्यवसायी शंभू प्रसाद रुंगटा, सोनू जायसवाल, दिनेश मद्धेशिया आदि भी कार्यक्रमों के आयोजन की तैयारी में लगे हैं। चाप गांव के अभय कुमार, नारायण सिंह, रामाज्ञा कुंवर, अरुण सिंह आदि कहते हैं कि सीताकुंड धाम में एक दिन भगवान राम व सीता की बारात रुकी थी। आज अयोध्या में जब भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा का अवसर है। उस समय सीताकुंड धाम में ऐतिहासिक कार्यक्रम होगा। इसको लेकर ग्रामीण एकजुट हैं।

सीता कुंड को लेकर लोगों की मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम व सीता के विवाह के उपरांत मिथिला से अयोध्या लौट रही बारात का रात्रि विश्राम सीताकुंड धाम में हुआ था। जनश्रुतियों के अनुसार, उस दिन भगवान राम व सीता के विवाह की चौथारी का कंगन खोलने की रस्म सीताकुंड में ही आयोजित की गई थी। मान्यताओं के अनुसार, भगवती सीता ने उस अवसर पर यहां भगवान शिव की एक अलौकिक लिंग की स्थापना की थी जो आज गिरिजा नाथ महादेव मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित है। लगभग आधा किलोमीटर गोलाकार क्षेत्र में स्थित सीताकुंड धाम के बीचोंबीच भगवती सीता के स्नान के लिए एक कुंड का निर्माण किया गया था, जिसे सीता कुंड कहा जाता है। यहां रामनवमी के अवसर पर रामनवमी मेला लगता है।

 

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