पटना: नीतीश सरकार द्वारा कराए गए बिहार जातीय गणना की रिपोर्ट को जारी कर दिया गया है। सबको पता चल गया है कि बिहार में किस जाती की कितनी आबादी है। लोग यह समझना चाहते हैं कि विभिन्न जातियों के लोगों की आर्थिक स्थिति कैसी है। गणना में संख्या के साथ उनके आर्थिक सामाजिक हालात की भी जानकारी ली गई है।

रिपोर्ट पर चर्चा के लिए आज सीएम नीतीश कुमार ने मंगलवार को सर्व दलीय बैठक बुलाई है। बैठक में रिपोर्ट के हर पहलु और कलेक्ट की गई सूचनाओं को खंगाला जाएगा। खासकर बिहार में रहने वाली 215 जातियों के लोगों के आर्थिक हालात कैसे हैं इसका खुलासा किया जाएगा। माना जा रहा है कि दोपहर बाद बैठक होगी जिसमें आर्थिक स्थिति की रिपोर्ट जारी की जाएगी। सोमवार को ही नीतीश कुमार ने बता दिया था कि सर्वदलीय बैठक में सभी पार्टियों के सामने सारे तथ्यों को रख दिया जाएगा और उनसे विचार विमर्श के बाद आगे का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जातीय गणना पर सहमति के लिए पूर्व में जिन दलों के साथ बैठक हुई थी उन्हें इसमें शामिल किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक सर्वदलीय बैठक में जिन दलों को न्योता दिया गया है उनमें भारतीय जनता पार्टी भी शामिल है। इसके अलावा लालू यादव की पार्टी आरजेडी, नीतीश कुमार की पार्टी जदयू, जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवा मोर्चा, कांग्रेस पार्टी, सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई एमएल और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम शामिल हैं।

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर जातिय आधारित गणना को लेकर 1 जून 2022 को सर्वदलीय बैठक आयोजित की गयी। इसमें सभी ने इसको लेकर अपनी सहमति दी। 24 मई को मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 1 जून को बैठक होने की जानाकरी दी थी। हालांकि पहले यह बैठक 27 मई को ही होनी थी, लेकिन कुछ दलों ने इसमें भाग लेने में असमर्थता व्यक्त की थी। इसके बाद 1 जून को बैठक करने का निर्णय लिया गया।
बताते चलें कि जातीय गणना की रिपोर्ट से जो आंकड़े सामने आए हैं उनके मुताबिक बिहार की आबादी 13 करोड़ सात लाख है। सबसे ज्यादा जनसंख्या ईबीसी यानी अत्यंत पिछड़ा वर्ग की 36 प्रतिशत है। दूसरे स्थान पर ओबीसी हैं जिनकी आबादी 27 परसेंट है। जातियों में यादवों की जनसंख्या सबसे अधिक (14 प्रतिशत) है।













Be First to Comment