नालंदा: बिहार का नालंदा जिला धार्मिक और पर्यटन दोनों के लिए खास है। यहां दुनिया की सबसे प्राचीन यूनिवर्सिटी नालंदा विश्वविद्यालय है तो वहीं दूसरी तरफ बौद्ध और जैन धर्म से जुड़े धार्मिक स्थल हैं। हालांकि इन सब में सबसे खास है जैन धर्म के पवित्र मंदिरों में से एक पावापुरी जल मंदिर। ये भव्य मंदिर विशाल सरोवर के बीच स्थित है। वहीं कुंड के चारों तरफ खूबसूरत कमल के फूल हैं। भगवान महावीर को समर्पित इस मंदिर में उनके पांवो के छाप देखने को मिलती हैं।
जैन धर्म के मुताबिक 24वें तीर्थकर महावीर को यहीं पर निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। पावापुरी में उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया था। मंदिर के भगवान महावीर की चरण पादुका रखी गई है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण उनके बडे़ भाई राजा नंदी वर्धन ने करवाया था। मंदिर का समय के साथ जीर्णोद्धार होता रहा। मंदिर तक जाने के लिए लाल बलुआ पत्थरों से बने 600 फीट लंबे पुल से होकर जाना होता है।
16.8 एकड़ में फैला जल मंदिर सफेद संगमरमर से बना है। मंदिर के चारों ओर खिले कमल के फूल आकर्षित करते हैं। वहीं झील में मछलियां और अन्य जलीय जीव देखने को मिल जाते हैं। जल मंदिर में दिवाली के मौके दो दिन का मेला लगता है। इस मेले को देखने दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक देखने आते हैं। इन दो दिनों में जैन धर्मावलंबियों की भीड़ जुटती है।
नालंदा के अन्य पर्यटन स्थल
नालंदा के अन्य टूरिस्ट स्पॉट की बात करें तो नालंदा विश्वविद्यालय, अशोक स्तूप, म्यूजियम, ह्वेन त्यांग मेमोरियल समेत अन्य कई पर्यटक स्थल हैं।
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