मोक्ष की भूमि गया में देश का सबसे बड़ा रबर डैम बनकर तैयार हो गया है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज फल्गु नदी पर बने इस रबर डैम का उद्घाटन करेंगे. इसके साथ ही सीएम नीतीश पितृपक्ष मेला महासंगम 2022 का भी उद्घाटन करेंगे. कार्यक्रम में डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव भी शामिल रहेंगे. पितृपक्ष के ठीक एक दिन पहले हो रहे इस उद्घाटन समारोह के सारे इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं. जल संसाधन विभाग के तमाम अधिकारी मौके पर जुटे हैं. बता दें कि सीएम नीतीश कुमार ने इसका नाम गया जी डैम रखा है. 411 मीटर लंबा और 3 मीटर ऊंचा यह रबर डैम 312 करोड़ की लागत से बना है.
राज्य के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने बताया कि आधुनिक तकनीक पर आधारित इस रबर डैम को ‘गया जी डैम’ नाम दिया गया है. इसके निर्माण से प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर के पास फल्गु में पूरे साल कम से कम दो फीट जल उपलब्ध रहेगा. इसके अलावा विष्णुपद मंदिर से सीताकुंड के बीच आवागमन के लिए फल्गु नदी पर 411 मीटर लंबा पैदल स्टील पुल, फल्गु के दोनों तट पर घाट और पुल से सीताकुंड तक जाने के लिए पैदल पथ आदि का भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लोकार्पण करेंगे. उन्होंने बताया कि परंपरागत कंक्रीट डैम के स्थान पर बिहार में पहली बार आधुनिक तकनीक पर आधारित रबर डैम का निर्माण कराया गया है. पर्यावरण पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा.
पानी की कमी नहीं होगी
गया में बने देश के सबसे बड़े डैम की विशेषताओं के बारे में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता अश्विनी कुमार ने बताया कि इस डैम के बनने से विष्णुपद मंदिर के निकट मोक्षदायिनी फल्गु नदी में साल भर जल उपलब्ध रहेगा. देश-विदेश से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को फल्गु नदी में स्नान, तर्पण और पिंडदान के लिए जल की कमी नहीं होगी.
जानें रबर डैम की खासियत
रबर डैम की खासियत बताते हुए हाइड्रो कंस्ट्रक्ट के प्रकाश रेड्डी ने बताया कि यह डैम अपने आप में काफी खास है. योजना के तहत मंदिर के 300 मीटर निम्न प्रवाह में फल्गु नदी के बाएं तट पर 411 मीटर लंबा, 3 मीटर ऊंचा रबर डैम का निर्माण कराया गया है. इसमें फल्गु नदी के सतही और उप-सतही जल प्रवाह को रोककर जल का संचयन किया गया है और ठहरे हुए पानी के समय-समय पर प्रतिस्थापन के लिए बोरवेल की स्थापना की गई है.
सीपेज रोकने की व्यवस्था
नदी जल के भू-गर्भ प्रवाह (सीपेज) को रोकने के लिए रबर डैम के एक्सिस के नीचे और दाएं-बाएं तट के पास नदी तल के नीचे रॉक लेवल तक 1,031 मीटर लंबाई में आधुनिक तकनीक युक्त शीट पाइल और 300 मीटर में डायफ्राम वॉल का निर्माण किया गया है. ऐसे निर्माण से नदी के जल का भंडारण सुनिश्चित होगा और सीपेज अत्यंत कम होगी.
जानें रबर डैम की खासियत
रबर डैम की खासियत बताते हुए हाइड्रो कंस्ट्रक्ट के प्रकाश रेड्डी ने बताया कि यह डैम अपने आप में काफी खास है. योजना के तहत मंदिर के 300 मीटर निम्न प्रवाह में फल्गु नदी के बाएं तट पर 411 मीटर लंबा, 3 मीटर ऊंचा रबर डैम का निर्माण कराया गया है. इसमें फल्गु नदी के सतही और उप-सतही जल प्रवाह को रोककर जल का संचयन किया गया है और ठहरे हुए पानी के समय-समय पर प्रतिस्थापन के लिए बोरवेल की स्थापना की गई है.
सीपेज रोकने की व्यवस्था
नदी जल के भू-गर्भ प्रवाह (सीपेज) को रोकने के लिए रबर डैम के एक्सिस के नीचे और दाएं-बाएं तट के पास नदी तल के नीचे रॉक लेवल तक 1,031 मीटर लंबाई में आधुनिक तकनीक युक्त शीट पाइल और 300 मीटर में डायफ्राम वॉल का निर्माण किया गया है. ऐसे निर्माण से नदी के जल का भंडारण सुनिश्चित होगा और सीपेज अत्यंत कम होगी.
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