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गया में पत्रकार के घर डकै’ती, घर में घुस गए 5 बदमा’श, मां को भि’ड़ा दिया पि’स्टल

गया: शहर के चंदौती थाना क्षेत्र के शिवपुरी कॉलोनी में रहने वाले दैनिक अखबार के एक पत्रकार राजीव कुमार के यहां 5 की संख्या में रहे ह’थियारबंद डकै’तों ने दिन’दहाड़े करीब दस बजे ड’कैती की घट’ना को अंजाम दिया है। ड’कैत 6 लाख रुपए नकद और 2 लाख रुपए के जेवरात लू’ट ले गए।

Massive robbery at businessman's house in Madhubani dacoits burst bombs for  panic | मधुबनी में व्यवसायी के घर भीषण डकैती, दहशत के ल‍िए डकैतों ने फोड़े  बम | Hindi News, Bihar

डकै’त आधे घंटे के अंदर घर में रहे और पूरे परिवार को पि’स्टल का भ’य दिखा कर सारा सामान लू’ट गए। संबंधित मामले में चंदौती थाने की पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है। वह डॉ’ग स्क्वायड की टीम बुला रही है।

पत्रकार राजीव कुमार अपने मां- पिता के साथ शिवपुरी रोड नंबर 4 में रहते हैं। उनके पिता रिटायर्ड प्रोफेसर हैं। उन्होंने बताया कि सुबह के समय किसी ने दरवाजा नॉक किया तो उनकी मां ने दरवाजा खोला। दरवाजा खोलते ही डकैतों ने मां को पिस्टल भिड़ाया दिया और वे घर के अंदर धक्का देते हुए घुस गए। इस बीच राजीव कुमार और उनकी पत्नी भी पीछे से पहुंची गईं तो डकैतों ने उन दोनों का गला पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया।

राजीव ने ड’कैतों को कहा कि जो भी घर से ले जाना है। उसे ले जाओ पर किसी के साथ मारपीट नहीं करो। इस पर डकैतों ने घर को खंगालना शुरू कर दिया। डकैत पूरे घर को खंगालने लगे और वे करीब छह लाख रुपये नकद और दो लाख रुपये के जेवरात ले गए। डकैताें ने अलमारी और बेड की की तलाशी और उसमें से जो मिला उसे अपने कब्जे में ले लिया। डकैत राजीव की मां का मोबाइल भी ले गए हैं। जिसकी लोकेशन पुलिस की ओर से तलाशी गई तो वह भट्‌ट बिगहा गांव में मिला है।

उन्होंने बताया कि डकैतों की भाषा अजीब थी। साथ ही उनके कुछेक सवाल से ऐसा लग रहा था कि उन्होंने रेकी करने के बाद घटना को अंजाम को दिया है। डकैत हमारे बच्चों की जानकारी भी ले रहे थे। साथ ही पिता जी के नाम से जो जमीन है उसके के बारे में जानकारी ले रहे थे। पांच में से चार डकैत बगैर मास्क के थे और एक डकैत जो ज्यादा सवाल- जवाब कर रहा था। वह मास्क लगाए हुए था।

मौके पर पहुंची पुलिस ने राजीव कुमार के पिता से पूछा कि इतना कैश घर में क्यों रख रखा था। तो इस पर उन्होंने कहा कि हम पति-पत्नी दोनों बुजुर्ग हैं। बेटा ज्यादातर बोधगया में ही रहता है। ऐसे में बैंक आना जाना इस उम्र संभव नहीं है। इस लिहाज से हमने पैसे निकाल कर घर में रख रखा था।

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