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मुजफ्फरपुर की शाही लीची पर मौसम की मार, 50 फीसदी लीची का हुआ नुकसान

मुजफ्फरपुर: बिहार में भीषण गर्मी कहर बरपा रही है। भीषण गर्मी से राज्य की 60 नदियां सूख चुकी हैं। इसका बुरा असर फसलों पर भी साफ साफ दिखने लगा है। अप्रैल में अत्यधिक तापमान और लगातार पछुआ चलने के कारण जिले में 50 फीसदी तक लीची को नुकसान हुआ है।

Bihar effect of corona on the production of muzaffarpur famous litchi  farmers are worried about crop wastage and loss | Bihar: मुजफ्फरपुर की  मशहूर लीची के उत्पादन पर कोरोना का असर, फसल

केन्द्रीय कृषि विवि के मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि अप्रैल में लगातार 10-30 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से पछुआ हवा चली और तापमान 36-41.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके कारण करीब आधे लीची के दाने झड़ गए। बताया कि पिछले साल अप्रैल में पूर्वा-पछुआ दोनों हवा चलने से मौसम में नमी बरकरार रही, जिसके कारण लीची को इतनी क्षति नहीं हुई थी।

उद्यान रत्न ने बताया कि जिले में इस बार लीची में मंजर 70 फीसदी ही आया, ऊपर से मौसम की मार से किसान हताश हो चुके हैं। सरकार से हमारी मांग है कि 33 फीसदी रबी और खरीफ फसल की क्षति पर मुआवजा का प्रावधान लीची पर भी लागू हो। लीची एसोसिएशन के अध्यक्ष के अुनसार बीते वर्ष 70 हजार टन लीची का उत्पादन हुआ था, वहीं इस बार 40-50 हजार टन के बीच उत्पादन रहने की उम्मीद है। किसानों की ओर से लगातार मुआवजे की मांग उठ रही है। लीची एसोसिएशन किसानों की मांग को लेकर जल्द ही राज्य और केन्द्र सरकार को ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहा है।

जिले में 20 मई से लीची की तुड़ाई शुरू होने वाली है। अगर मौसम ठीक नहीं हुआ तो लीची के उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र मुशहरी के निदेशक ने सलाह दी कि किसान लीची के दाने को गिरने से रोकने के लिए बोरन का छिड़काव जरूर करें, ताकि लीची के फल का छिलका और डंठल मजबूत रहे। कहा कि पूर्वा हवा में लीची झड़ना बंद हो सकता है।

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