पटना: बिहार में जाति आधारित सर्वेक्षण से उत्साहित आरजेडी नेता और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ जातीय गणना रिपोर्ट का इस्तेमाल राजद के ही एक एमएलसी ने कर लिया है। आरजेडी अति पिछड़ा प्रकोष्ठ अध्यक्ष और एमएलसी रामबली सिंह चंद्रवंशी ने जातीय गणना रिपोर्ट में अति पिछड़ों की सर्वाधिक आबादी को आधार बनाकर कहा है कि एक नंबर की कुर्सी (मुख्यमंत्री) ईबीसी को मिलनी चाहिए।
आरजेडी के विधान पार्षद रामबली सिंह चंद्रवंशी ने कहा- “इस गणना को भी अगर हम मानें तो सबसे बड़ा ग्रुप अति पिछड़ा ही है। तो अति पिछड़ा को सत्ता की बात होनी चाहिए। एक नंबर का कुर्सी अति पिछड़ा को मिलना चाहिए। अब अति पिछड़ा जाग गए हैं। हर जिले, हर कस्बे, हर पंचायत में अति पिछड़ा वर्ग के लोग समझदार हो गए हैं। अपने साथ नाइंसाफी और हकमारी को समझने लगे हैं। अगर जातीय गणना में घालमेल नहीं है तो सरकार वार्ड वाइज सूची प्रकाशित करे। ऑफिस में बैठकर संख्या बढ़ाई गई है, उसका पोल खुल जाएगा। गणना के रिपोर्ट के पीछे राजनीतिक साजिश है।”
रामबली सिंह चंद्रवंशी ने पिछले सप्ताह अति पिछड़ा आरक्षण बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले एक कार्यक्रम में कहा था कि तेली, तमोली और दांगी को 2015 में अति पिछड़ा में शामिल करके ईबीसी के साथ हकमारी की गई। चंद्रवंशी ने कहा था कि नगर निगम के चुनाव में अति पिछड़ा की तीन मेयर सीट तेली जाति के लोगों ने कब्जा कर लिया। जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव में भी अति पिछड़ा के लिए आरक्षित आठ में सात सीट इन तीन जातियों ने हड़प लिया जिनको 2015 में अति पिछड़ा की सूची में शामिल किया गया।


रामबली सिंह चंद्रवंशी से पहले महागठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे नीतीश कुमार की जेडीयू के सांसद सुनील कुमार पिंटू ने तेली समाज की संख्या कम होने का आरोप लगाते हुए जातीय गणना रिपोर्ट पर सवाल उठाया था। पिंटू ने कहा था कि तेली समाज की आबादी 2.81 परसेंट बताई गई है जबकि इनकी आबादी 5 परसेंट से अधिक है। पिंटू बीजेपी के विधायक थे लेकिन सीतामढ़ी लोकसभा सीट एनडीए गठबंधन में जेडीयू को चली गई और माना जाता है कि बीजेपी के इशारे पर नीतीश ने सुनील कुमार पिंटू को जेडीयू से टिकट दिया और वो जीते।
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