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बिहार: फ’र्जीवाड़ा कर मुखिया बनी बहुरानी गयी जेल, अब जांच के घेरे में आए सीओ और राजस्व कर्मचारी

गोपालगंज: गोपालगंज के भोरे प्रखंड की गोपालपुर पंचायत की मुखिया कविता देवी को गिर’फ्तार कर लिया गया है। कविता देवी पर फ’र्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लड़ने और चुनाव जीतकर मुखिया बनने का आ’रोप था। इस मामले में तत्कालीन सीआइ सह राजस्व कर्मचारी धनंजय सिंह की गिर’फ्तारी भी होनी तय मानी जा रही है। वहीं जाति प्रमाणपत्र जारी करने वाले सीओ चंद्रभानु कुमार की मुश्किलें भी काफी बढ़ गयी हैं।

gopalpur mukhiya kavita devi arrested in false documents case in gopalganj  bihar news skt | बिहार: फर्जीवाड़ा करके मुखिया बनीं बहू रानी गयी जेल, जांच  के बाद राजस्व कर्मचारी और सीओ के

बताया जा रहा है कि, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2021 में गोपालपुर पंचायत से मथौली निवासी विजेंद्र गुप्ता की पत्नी कविता देवी चुनाव लड़ी थीं. जिसमें उनके द्वारा ससुराल को मायके बताकर फर्जी पते के आधार पर जाति प्रमाणपत्र बनवाया गया था। इस प्रमाणपत्र की जांच राजस्व कर्मचारी धनंजय सिंह के द्वारा की गयी थी। इसके बाद इस प्रमाणपत्र को निर्गत करने का काम सीओ चंद्रभानु कुमार ने किया था। इसके बाद महिला मुखिया से इस प्रमाणपत्र के आधार पर अपना नामांकन भी दाखिल किया और इसके बाद चुनाव लड़कर विजयी हो गयीं।

वहीं, दूसरी तरफ कविता देवी से चुनाव हारने वाली संजू प्रजापति जाति प्रमाण पत्र को लेकर लगातार उच्च अधिकारियों के पास शिकायत करती रहीं।  लेकिन, कसी भी तरह की कार्रवाई नहीं होने पर संजू प्रजापति के पति संतोष प्रजापति ने गोपालगंज कोर्ट में शिकायत दर्ज करायी। इसमें कोर्ट के आदेश पर स्थानीय थाने में मुखिया कविता देवी, सीओ चंद्र भानु कुमार, तत्कालीन सीआई धनंजय कुमार सिंह के खिलाफ 13 सितंबर 2022 को भोरे थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। इसी मामले में दो दिन पहले ही कोर्ट ने कविता देवी और राजस्व कर्मचारी धनंजय कुमार सिंह के खिलाफ वारंट जारी किया था। वहीं चंद्रभानु कुमार की संलिप्तता की जांच का आदेश पुलिस को दिया गया था।

इधर, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वारंट के आधार पर विजयीपुर में छापेमारी की और कविता देवी को महिला पुलिस बल के सहयोग से गिरफ्तार कर लिया।  गिरफ्तारी के बाद उन्हें तत्काल ही कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। गोपालपुर पंचायत की मुखिया कविता देवी यूपी के देवरिया जिले की निवासी थीं। पंचायत चुनाव में नामांकन के दौरान डीएम ने यह निर्देश दिया था कि मायके का जाति प्रमाणपत्र ही मान्य होगा। लेकिन कविता देवी ने अपने ससुराल मथौली का पता अपने पिता और माता के आधार कार्ड पर दर्ज करवा कर जाति प्रमाणपत्र अप्लाई कर दिया। बिना जांच किये ही राजस्व कर्मचारी धनंजय कुमार सिंह ने उसे पास किया और सीओ चंद्रभानु कुमार द्वारा जाति प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया था. इसे लेकर पूरा मामला चल रहा था।
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