भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी कथित पुलिस मुठभे’ड़ मामले में जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है। मामले की जांच कर रही विशेष टीम ने बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के जवान अक्षय कुमार को गिरफ्ता’र कर लिया है। जांच एजेंसियों की अब तक की कार्रवाई में इसे सबसे अहम कदम माना जा रहा है। गिरफ्ता’री वैज्ञानिक साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर की गई है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, घ’टना के दिन भरत तिवारी ने पुलिस और STF टीम के सामने कथित तौर पर आत्मसमर्पण कर दिया था। आरो’प है कि इसके बावजूद सबसे पहली गो’ली STF जवान अक्षय कुमार ने चलाई। पहली गो’ली लगने के बाद भरत तिवारी जमीन पर गिर पड़े और इसके बाद उन्हें तीन और गो’लियां मा’री गईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौ’त हो गई। यदि जांच में यह आ’रोप सही साबित होते हैं, तो पूरा मामला कथित फर्जी एनका’उंटर और ह’त्या के गंभीर आ:रोपों में बदल सकता है।

इस मामले में कार्रवाई तब तेज हुई, जब 24 जुलाई को भरत तिवारी के परिजनों ने पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और दोषि’यों पर कार्रवाई की मांग की। मुख्यमंत्री ने परिजनों को जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया था। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी से फैसले लिए गए।
सबसे पहले तत्कालीन SDM संजीत कुमार को उनके पद से हटाया गया। इसके बाद तत्कालीन SDPO राजेश कुमार शर्मा को भी लाइन हाजिर कर दिया गया। इन प्रशासनिक कार्रवाइयों के बाद से ही माना जा रहा था कि जांच एजेंसियां जल्द ही पुलिस टीम के सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती हैं। अब STF जवान अक्षय कुमार की गिरफ्ता’री के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मृ’तक के परिजनों ने इसे न्याय की दिशा में पहला बड़ा कदम बताया है, लेकिन उनका कहना है कि केवल एक जवान की गिर’फ्तारी पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मुठ’भेड़ में शामिल अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ भी ह’त्या का मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्ता’र जवान से पूछताछ के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है। यदि पूछताछ में नए तथ्य सामने आते हैं, तो इस मामले में कई अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।










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