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भतीजे की ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं छोड़ रहे नीतीश, अखिलेश-ममता के पास साथ जाएंगे तेजस्वी

बिहार: मिशन लोकसभा चुनाव में जुटे नीतीश कुमार  विपक्ष को एकजुट करने के लिए आज तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और प.बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी मिलेंगे। लेकिन इस दौरान उनके साथ आरजेडी नेता और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव भी मौजूद रहेंगे। इससे पहले दिल्ली दौरे के दौरान भी नीतीश के साथ तेजस्वी यादव ने भी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ,कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी। कहा जा रहा कि अब नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति की ओर रुख करेंगे। तो वहीं बिहार की बागडोर कभी भी तेजस्वी को सौंप सकते हैं। हालांकि इसके कयास तो होली के वक्त ही लगाए जा रहे थे। जब आरजेडी के नई नेताओं ने तो तेजस्वी की ताजपोशी की तारीख तक तय कर दी थी। लेकिन फिर लैंड फॉर जॉब घोटाले में सीबीआई और ईडी जांच के फेरे में लालू परिवार ऐसा फंसा कि तेजस्वी ताजपोशी ही टल गई।

भतीजे की ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं छोड़ रहे नीतीश, अखिलेश-ममता के पास तेजस्वी यादव को साथ ले जा रहे

तेजस्वी की ट्रेनिंग में नीतीश नहीं छोड़ रहे कमी
लेकिन नीतीश कुमार भतीजे तेजस्वी की ट्रेनिंग में किसी तरह की कोई कमी नहीं छोड़ रहे। वो भले खुद केंद्र की बैठकों में न जा पाएं। लेकिन बिहार का प्रतिनिधित्व करने के लिए तेजस्वी को जरुर भेजते हैं। फिर चाहे वो बीते साल दिसंबर में कोलकाता में हुई नेशनल गंगा काउंसिल की बैठक हो या फिर बीते साल 17 दिसंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई ईस्टर्न जोनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक। दोनों बैठकों में तेजस्वी यादव ही शामिल हुए थे। बाकी राज्यों से मुख्यमंत्रियों ने इस बैठक में हिस्सा लिया था।। लेकिन बिहार से डिप्टी सीएम तेजस्वी इन मीटिंग्स में शामिल हुए।

नीतीश ने दिया था तेजस्वी को उत्तराधिकारी बनाने का संकेत
तेजस्वी को केंद्रीय बैठकों में भेजना इस बात का साफ संकेत था कि नीतीश कुमार उन्हें राज्य के कामकाज का अनुभव सीखाना चाह रहे हैं। वही नीतीस कुमार इस बात की भी घोषणा कर चुके हैं। कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का प्रतिनिधित्व तेजस्वी यादव करेंगे। वहीं नालंदा में एक कार्यक्रम के दौरान नीतीश ने कहा था कि तेजस्वी अब उनकी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को पूरा करेंगे। जिसके बाद से कयास लगाए जाने लगे कि जल्द ही नीतीश कुमार तेजस्वी को सत्ता हैंडओवर कर देंगे। उनके इस ऐलान के बाद जदयू में दरार पड़ गई थी। जिसके चलते उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू का साथ ही छोड़ दिया।

विपक्षी एकता को मजबूत करने में जुटे नीतीश
कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों को जुटे हैं। और पूरे विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश में लगे हैं। जिसके चलते शायद उन्होने अपना उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव को चुन लिया है। सिर्फ केंद्र की बैठकों में ही नहीं बल्कि विपक्ष को एकजुट करने की कवायद में भी तेजस्वी को साथ लेकर चल रहे हैं। और पूरी तरह सियासत की ट्रेनिंग दे रहे हैं। अब ममता और अखिलेश ये मुलाकात के लिए तेजस्वी भी नीतीश के साथ रहेंगे।

तेजस्वी भी कर चुके हैं दलों से अपील
वैसे तेजस्वी ने भी नीतीश के दिल्ली दौरे से पहले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। और जल्द सभी दलों से एक जुट होने की अपील की थी। लैंड फॉर जॉब स्कैम की जांच के दौरान तेजस्वी ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए। जल्द से जल्द सभी विपक्षी दलों को एकजुट होने का आह्वान किया था। नीतीश कुमार की विपक्ष को एकजुट करने की मुहिम क्या रंग लाएगी ये तो वक्त ही बताएगा। लेकिन तेजस्वी यादव की सियासी ट्रेनिंग जरुरी अच्छी हो रही है।

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