विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी ने मुजफ्फरपुर पहुंचकर बिहार पुलिस और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि पप्पू सहनी के कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में समय रहते दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई होती, तो आरा में भरत तिवारी की ह’त्या जैसी घ’टनाएं नहीं होतीं।
मुकेश सहनी ने कहा कि करीब चार महीने पहले मुजफ्फरपुर में पप्पू सहनी का कथित फर्जी एनकाउंटर हुआ था। उस समय उन्होंने मामले को गंभीरता से उठाया था और जिला प्रशासन से जांच की मांग की थी। उनके अनुसार, तत्कालीन एसएसपी ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

उन्होंने दावा किया कि पप्पू सहनी के खिलाफ पिछले तीन वर्षों में कोई आपरा’धिक मामला दर्ज नहीं हुआ था, इसके बावजूद पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया। सहनी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पुलिसकर्मी के पेट में गो’ली लगने की बात कही गई थी, वह आज भी जीवित है, जबकि पप्पू सहनी के पैर में गो’ली लगने के बावजूद उसकी मौ’त हो गई। उन्होंने कहा कि घट’ना को कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
वीआईपी सुप्रीमो ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला, तो अगले महीने उनकी पार्टी आंदोलन करेगी और शहर में चक्का जाम किया जाएगा।
इस दौरान मुकेश सहनी ने हाल ही में आरा में हुए भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा कराई जा रही है। सहनी का आरोप है कि बिहार पुलिस जाति देखकर कार्रवाई कर रही है और जाति के आधार पर न्याय दे रही है।



















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