वैशाली: बिहार के वैशाली जिले में एक ऐसा इलाका है जहां के लोग छह महीने सीधी सड़क से अपने जिला मुख्यालय हाजीपुर नहीं जा पाते। उन्हें नाव का सहारा लेना पड़ता है। यह क्षेत्र है राघोपुर प्रखंड के रुस्तमपुर से कच्ची दरगाह एवं सैदाबाद जेठुली का इलाका। राघोपुर से पटना आने और जाने वाले यात्री जान हथेली पर रखकर ओवरलोड नावों का सफर कर रहे हैं क्योंकि नावों पर ओवरलोडिंग की जाती है। छह महीने के लिए नाव पर निर्भरता उनकी मजबूरी भी है। चारों ओर से नदियों से घिरे राघोपुर को राजधानी पटना और हाजीपुर मुख्यालय से जुड़ने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा हैं। क्योंकि इन दोनों शहरों को जोड़ने वाले पीपापुल बरसात में खोल दिए जाते हैं।

नाविक कुछ रुपयों की लालच में क्षमता से अधिक यात्रियों को नाव पर बैठाने से गुरेज नहीं करते। पिछले वर्ष सैदाबाद और जेठुली घाट के बीच एक युवक ओवरलोड नाव से फिसलकर नदी में गिर गया था। ओवर लोड नाव पर लदी बारात जा रही एक स्पकॉर्पियो के पलटने दो लोगों की मौ’त हो गई थी। एसडीआरएफ ने स्कॉर्पियो को घट’नास्थल से 250 मीटर की दूरी पर बरामद किया था।

दोनों घाटों पर नाविक चौकीदार एवं पुलिस तैनात किए जाते हैं। लेकिन दबंग नाविक पुलिस की मौजूदगी में नाव को ओवरलोड कर ले जाते हैं। मजबूरी में लोग जान खत’रे में डालकर सफर करते हैं। जिले के प्रशासनिक पदाधिकारी एवं अन्य कर्मचारी भी इन्हीं नावों से पार उतरते हैं। वे भी ओवरलोडिंग रोकने का प्रयास नहीं करते।

कई गुना अधिक भाड़ा वसूलते हैं
रुस्तमपुर कच्ची दरगाह घाट पर छोटी नाव पर 50 दोपहिया एवं 75 लोगों को जबकि बड़ी नाव पर 70 दुपहिया एवं 150 लोगों को सवार कराया जा रहा है। जबकि छोटी नाव पर 30 सवारी व 20 बाइक, जबकि बड़ी नाव पर 40 सवारी और 30 बाइक ले जाने की अनुमति है। यही नहीं प्रशासन द्वारा एक सवारी के लिए 10 बाइक के साथ 30 और कार के साथ 350 रुपए किराया तय है, जबकि नाविक इससे कई गुना अधिक पैसा लेते हैं।













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