सत्तूआनी पर्व बुधवार को मनाया जाएगा। इसकी तैयारी पूरी हो गई है। मंगलवार को लोगों ने बाजार में सत्तू और कच्चे आम की खरीदारी की। इन दिन गंगा, नदी और तालाबों में स्नान के बाद सत्तू और कच्चा आम की चटनी खाने की परंपरा रही है। हालांकि इस बार कोरोना के कारण घर पर ही इसे किया जा रहा है। साथ ही स्नान के बाद सत्तू, घड़ा में पानी, गुड़, वस्त्र और पंखा भी दान करना चाहिए। बाबा गरीबनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पं.विनय पाठक ने बताया कि बुधवार की सुबह से ही लोग इस त्योहार को मना सकेंगे। स्नान के बाद पूजन व दान करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। साथ ही लोग पुण्य के भागी होते हैं।
जूड़शीतल कल
पर्यावरण और स्वच्छता को लेकर मिथिलांचल में मनाया जाने वाला जूड़शीतल पर्व गुरुवार को मनाया जाएगा। पं.विनय पाठक ने बताया कि यह प्रकृति का संयोग है कि मिथिलांचल के नए साल की शुरुआत तपती गर्मी से होती है। इसके स्वागत में बड़े-बुजुर्ग सुबह-सुबह छोटों के सिर पर बासी जल देकर शीतलता के साथ जीवन जीने का आशीष देते हैं। माना जाता है कि इससे शीतलता सदा बरकरार रहती है। इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाने की भी परंपरा रही है। बताया कि यह मूल रूप से पर्यावरण व स्वच्छता से जुड़ा है।















Be First to Comment