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स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय जी, अपने विधायक का जलवा देखिए… गाइडलाइन तोड़ घर में ले ली वैक्सीन

मुजफ्फरपुर जिले से वायरल हुई एक तस्वीर ने बिहार सरकार के कोरोना मैनेजमेंट पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस तस्वीर में एक विधायक अस्पताल न जाकर घर में ही कोरोना वैक्सीन ले रहे हैं जो कि गाइडलाइन का सरासर उल्लंघन है।

पारु विधायक अशोक सिंह की तस्वीर वायरल
पारू विधानसभा के बीजेपी विधायक अशोक सिंह के घर में टीका लगवाने का फोटो वायरल हो रहा है। बड़ी बात ये है कि लेकिन इस बात का कोई प्रावधान नहीं है की जनप्रतिनिधियों के घर में जाकर टीकाकरण किया जाएगा।

खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी दिल्ली के एम्स जाकर कोरोना वैक्सीन लिया था। बात करें बिहार की तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी पटना के आईजीआईएमएस में जाकर कोरोना का टीका लिया था। इन दो बड़ी हस्तियों के लिए भी गाइडलाइंस वही थे दो बनाए गए हैं। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया।

संजय जायसवाल जी, सुशील मोदी जी… अपने विधायक का जलवा देखिए
लेकिन इन सबों से अलग बीजेपी विधायक ने अलग ही जलवा दिखाया। अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए अशोक सिंह ने स्वास्थ्य कर्मी को घर बुलाया और कोरोना का टीका लिया।जबकि सभी लोगों को अस्पताल जाकर ही टीकाकरण करने का निर्देश दिया गया है।

उधर कुछ मीडिया हाउस ने इस मामले को लेकर जब विधायक अशोक कुमार से बात की तो उन्होंने बताया की घर पर एक एएनएम और एक स्टाफ आई थी और उन्होंने ही टीका दिया है।

104 नंबर पर फोन करने पर मिला ये जवाब
वही इस मामले को लेकर जब 104 नम्बर पर बात की गई तो बताया गया कि केवल अस्पतालों में जाकर ही टीका लेने का प्रावधान है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरुरी है जबकि जिले के सिविल सर्जन और जिलाधिकारी भी इस मामले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।

नीतीश जी, देखिए अपना कोरोना मैनेजमेंट
लेकिन अब इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब खुद नर्स वहां मौजूद थी तो बीडीओ ने वैक्सीन क्यों लगाई जबकि वो खुद ट्रेंड भी नहीं हैं। हालांकि तर्क दिया जा रहा है कि बीडीओ दीनबन्धु दिवाकर बीडीओ बनने से पहले एमबीबीएस की पढ़ाई कर चुके हैं। उनकी लोकसेवा में रुचि थी इसलिए बीडीओ की नौकरी चुनी।

इस पर भी सवाल उठे कि क्या राज्य में कोरोना मैनेजमेंट के लिए सिर्फ MBBS की पढ़ाई ही काफी है, क्या इसके लिए ट्रेनिंग जरुरी नहीं है। बात अगर क्राइसिस मैनेजमेंट की होती तो समझा भी जा सकता था, लेकिन नर्स के मौजूद रहते बीडीओ से अगर मुखिया ने ऐसी फरमाइश कर दी थी तो क्या बीडीओ को ये नहीं समझना चाहिए था कि वो इसके लिए ट्रेंड नहीं हैं।

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