बिहार में मानसून इस साल उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है। जून और जुलाई के बाद अब अगस्त की शुरुआत भी कमजोर बारिश के साथ हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राज्य में अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण इस बार मानसून सामान्य से कमजोर बना हुआ है। इसके चलते न सिर्फ बारिश में भारी कमी दर्ज की गई है, बल्कि आने वाले हफ्तों में भी सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई गई है।
राज्य में 1 जून से 1 अगस्त तक सामान्य तौर पर 512.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस अवधि में केवल 294.4 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। यानी बिहार में अब तक करीब 43 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसका सीधा असर खेती, जल स्रोतों और लोगों की दिनचर्या पर पड़ रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार अगस्त के पहले सप्ताह में उत्तर बिहार के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, लेकिन पूरे राज्य में व्यापक और लगातार बारिश की संभावना फिलहाल कम है। राजधानी पटना समेत दक्षिण बिहार के अधिकांश इलाकों में बादलों की आवाजाही तो रहेगी, लेकिन उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कम है। पूर्वानुमान के मुताबिक अगस्त में अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान सामान्य से ऊपर रह सकते हैं। ऐसे में लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है।
बिहार में मानसून आमतौर पर जून के मध्य में प्रवेश करता है और सितंबर के अंत तक सक्रिय रहता है। इस बार मानसून समय से पहले पहुंचा, लेकिन इसके बावजूद पूरे राज्य में बारिश का वितरण बेहद असमान रहा। जून और जुलाई के दौरान कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई, जबकि कुछ स्थानों पर ही भारी वर्षा दर्ज की गई। कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान सहित खरीफ फसलों की खेती प्रभावित हो रही है और कई इलाकों में सिंचाई पर निर्भरता बढ़ गई है।









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