बिहार के चर्चित आईएएस अधिकारी जी. कृष्णैया ह’त्याकांड में एक बार फिर बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सांसद आनंद मोहन की समय से पहले रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से की गई सख्त टिप्पणियों ने इस पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अदालत ने सवाल उठाया कि ड्यूटी पर तैनात एक सरकारी अधिकारी की हत्या को आखिर “दुर्लभतम” मामलों की श्रेणी में क्यों नहीं माना गया।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि बिहार सरकार ने वर्ष 2023 में जेल नियमों में संशोधन कर आनंद मोहन समेत कई उम्रकैद के सजायाफ्ता कैदियों की समय पूर्व रिहाई का रास्ता साफ किया था। अब इस फैसले की वैधता पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट के हाथ में है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत यह तय करेगी कि बिहार सरकार द्वारा जेल नियमों में किया गया संशोधन और उसके आधार पर आनंद मोहन की समय पूर्व रिहाई कानून की कसौटी पर सही थी या नहीं।इस फैसले का असर केवल आनंद मोहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में समय पूर्व रिहाई से जुड़े मामलों और सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ गंभीर अपराधों पर बनने वाली कानूनी मिसाल पर भी पड़ सकता है। इसलिए पूरे देश की नजर अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।











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