बिहार के चर्चित देव कुमार गुंजन ह’त्याकांड में सामने आए खुलासे कई ऐसे सवाल छोड़ रहे हैं, जिनका जवाब सिर्फ कानून ही नहीं, समाज को भी तलाशना होगा। पुलिस की जांच के मुताबिक यह कोई गुस्से में उठाया गया कदम नहीं था, बल्कि वर्षों से तैयार की गई एक सुनियोजित सा’जिश थी। अगर जांच एजेंसियों के दावों पर भरोसा करें तो इस कहानी में प्रेम, धोखा, सुपारी, तकनीक और ह’त्या की ऐसी पटकथा है जिसने हर किसी को चौंका दिया है।
पुलिस के अनुसार समिता और अजीत कुमार की मुलाकात करीब नौ साल पहले बिजली विभाग में नौकरी के दौरान हुई थी। दोनों टेक्नीशियन थे। साथ काम करते-करते दोस्ती हुई और फिर यह रिश्ता प्रेम में बदल गया। लेकिन परिवार ने समिता की शादी देव कुमार गुंजन से करवा दी। यहीं से कहानी ने वह मोड़ लिया, जो आज एक ह’त्या के केस में बदल चुका है। जांच एजेंसियों का दावा है कि शादी के बावजूद दोनों ने अपना रिश्ता खत्म नहीं किया। बल्कि आ’रोप है कि उसी दौरान भविष्य में देव कुमार को रास्ते से हटाने की योजना भी बन गई थी।
जांच में सामने आया कि समिता की पोस्टिंग बाद में सुपौल में मोटरयान निरीक्षक (एमवीआई) के रूप में हो गई। पति दूसरे जिले में नौकरी करते थे। दूरी बढ़ी तो प्रेमी से मुलाकातें भी आसान हो गईं। पुलिस के मुताबिक दोनों लगातार संपर्क में रहे। मोबाइल कॉल, व्हाट्सएप कॉल और मुलाकातों का सिलसिला चलता रहा। फॉरेंसिक जांच में एक साल के भीतर 186 कॉल सामने आने का दावा किया गया है। घ’टना वाले दिन भी तड़के तीन बजे से लेकर वा’रदात तक लगातार बातचीत हुई। यहीं से पुलिस का शक मजबूत होता चला गया।
पुलिस का दावा है कि कई सस्पेंस और थ्रि’लर फिल्में देखने के बाद ह’त्या की ऐसी योजना बनाई गई जिससे मामला लू’टपाट जैसा दिखाई दे। चलती ट्रेन चुनी गई। भीड़भाड़ वाला डिब्बा चुना गया। पति को उसी ट्रेन से आने के लिए कहा गया। फिर कथित तौर पर सु’पारी कि’लर को फोटो, लोकेशन और पूरी यात्रा की जानकारी दी गई। योजना यह थी कि गो’ली मा:रकर ह’त्या कर दी जाए और बाद में कहा जाए कि बद’माशों ने लू’टपाट के दौरान गो’ली मा’र दी।
रेल पुलिस के अनुसार आरो’पियों की तीन बड़ी गलतियों ने पूरी सा’जिश का पर्दाफाश कर दिया। पहली—ट्रेन में किसी और यात्री के साथ लू’टपाट नहीं हुई। निशाना सिर्फ देव कुमार थे। दूसरी—घट’ना से पहले और वा’रदात के दौरान मोबाइल कॉल और व्हाट्सएप कॉल का रिकॉर्ड लगातार सामने आया। तीसरी—तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों की मदद से कथित शू’टर की गतिविधियां पुलिस ने जोड़ लीं। यहीं से कहानी बदल गई। जो मामला लू’टपाट लग रहा था, वह कथित तौर पर सुपारी देकर कराई गई ह’त्या में बदल गया।
पुलिस का दावा है कि ह’त्या के लिए चार लाख रुपये की सु’पारी तय हुई थी। इसमें से करीब 1.60 लाख रुपये एडवांस दिए गए। कथित शू’टर ने पहले कई बार ट्रेन में रेकी की। मृ’तक की तस्वीर और यात्रा की जानकारी पहले से उपलब्ध कराई गई।अगर यह आ’रोप अदालत में साबित होते हैं तो सवाल सिर्फ अपरा’ध का नहीं, बल्कि इंसानी संवेदनाओं के पतन का भी होगा।
रेल पुलिस के अनुसार तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और पूछताछ के आधार पर पत्नी समिता कुमारी, प्रेमी अजीत कुमार और कथित सुपारी कि’लर राजू कुमार उर्फ धीरज को गिरफ्ता’र किया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि ह’त्या पूरी योजना के तहत कराई गई। हालांकि अंतिम सच अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही तय होगा।












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