वाल्मीकि व्याघ्र परियो’जना (वीटीआर) में शिका’रियों द्वारा ल’गाए गए तार का फंदा दो सा’ल के गैंडे के ब’च्चे की गर्दन में घुस गया है। गैंडा बुरी तरह से ज’ख्मी है। व्याघ्र परि’योजना ने गैंडे की गर्दन से तार नि’कालने के लिए गुवाहा’टी के पशु सर्जन पद्मश्री प्रो’फेसर कौशल के. शर्मा को बुला’या है। वहीं गैंडे को बेहोश करने के लिए दवा लाने एक पशु चिकि’त्सक को दुध’वा नेशनल पार्क भेजा गया है। वीटीआर के निदेशक हेमकांत राय ने बताया कि सोम’वार को वनकर्मियों ने गैंडे की गर्दन में जख्’म देखा। उसमें बाइक के एक्’सलेटर में इस्तेमाल होने वाला तार घुसा हुआ था। तार शिका’रियों ने लगाया था या खेत की घेरा’बंदी में लगा हुआ था, इस’की जांच हो रही है।
निदेशक ने ब’ताया कि गैंडे को रेस्क्’यू कर सर्जरी की जाएगी। गुवा हाटी के प्रसिद्ध पशु सर्जन पद्मश्री प्रो’फेसर कौशल के. शर्मा से सं’पर्क किया गया। उन्होंने आने की सह’मति दी है। लेकिन गैंडे को बेहो’श करने वाली एम 99 दवा बिहार में नहीं है। दु’धवा नेशनल पार्क के अधिका’रियों से संपर्क किया गया तो वहां दवा उपल’ब्ध थी। व्याघ्र परियो’जना के एक पशु चिकित्’सक को दवा लाने के लिए दुधवा भेजा गया है। वे बुधवार की देर शा’म तक दवा लेकर पहुंचेंगे।

इलाज के लिए रखने को बना”या गया बोमा :
निदे’शक ने बताया कि गैंडे की सर्जरी व उसके इला’ज में लगभग एक प’खवारे का समय लगेगा। सर्जरी के बाद उसके घा’व पर दवा लगाने के लिए उसे सुर’क्षित रख’ना जरूरी है। इसके लिए वीटी’आर में 50-50 फीट का एक छोटा सा इन्क्’लोजर बनाया जा रहा है, जिसे बो’मा कहा जाता है। सर्जरी के बाद गैंडे को इसी में रखा जा’एगा। वहां उसके स्वा’स्थ्य की निग’रानी के साथ दवाएं दी जाएगी।
नेपाल के चि’तवन से आए हैं दोनों गैंडे:
वीटीआर नेपा’ल के चित’वन राष्ट्रीय नि’कुंज से सटा है। चितवन में सात सौ से ज्या’दा गैंडे हैं। यहां से गैंडे बाढ़ में बह’कर या नदी के रास्ते वीटीआर में पहुं’च जाते हैं। अब तक सा’त गैंडों की मौत वि’भिन्न कार’णों से वीटीआर में हो चुकी है। हा’ल में दो नर गैंडे वीटीआर में आए हैं, जिनमें एक की उम्र 15 सा’ल व दूसरे की उम्र दो साल है। दो साल की उम्र वाले गैंडे की गर्दन में शिका’रियों द्वारा लगा’या तार घुस गया है।









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