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पटना मेट्रो का सपना हकीकत के करीब; मलाही पकड़ी से खेमनीचक तक सफल रहा निरीक्षण, अब ट्रायल की बारी

पटना : पटनावासियों का मेट्रो का लंबा इंतजार अब खत्म होने वाला है। शुक्रवार को केंद्र सरकार के इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर जनरल द्वारा किए गए गहन निरीक्षण में पटना मेट्रो की बिजली आपूर्ति और तकनीकी व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित पाया गया है। मलाही पकड़ी से खेमनीचक के बीच बिजली व्यवस्था को हरी झंडी मिलने के साथ ही अब फरवरी में मेट्रो परिचालन शुरू होने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।

बिजली व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की सफल जांच

इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर जनरल जगदीश कुमार के नेतृत्व में टीम ने मलाही पकड़ी सब-स्टेशन और ओएचई (ओवरहेड तारों) की बारीकी से टेस्टिंग की। इस दौरान इंटरलॉकिंग सिस्टम, अर्थिंग क्षमता, रिले और सिग्नल से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को परखा गया। जांच में सभी पैरामीटर सुरक्षा मानकों पर खरे उतरे हैं, जो मेट्रो चलाने की दिशा में एक बड़ी तकनीकी जीत है।

प्रायोरिटी कॉरिडोर: दो नए स्टेशनों पर काम अंतिम चरण में

मेट्रो प्रशासन का मुख्य ध्यान फिलहाल प्रायोरिटी कॉरिडोर पर है। इस कॉरिडोर के पांच एलिवेटेड स्टेशनों में से न्यू आईएसबीटी, जीरो माइल और भूतनाथ पहले ही तैयार थे। अब खेमनीचक और मलाही पकड़ी स्टेशनों पर भी सिविल वर्क पूरा हो चुका है। वर्तमान में एस्केलेटर लगाने और फिनिशिंग का काम युद्धस्तर पर चल रहा है, जिससे ट्रायल रन का रास्ता साफ हो गया है।

फरवरी में परिचालन की तैयारी और अंतिम बाधाएं

अधिकारियों के अनुसार, सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो फरवरी में मलाही पकड़ी से बैरिया बस स्टैंड तक मेट्रो का परिचालन शुरू किया जा सकता है। अब अगला और सबसे महत्वपूर्ण चरण रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की फाइनल जांच होगी। उनकी हरी झंडी मिलते ही मेट्रो का व्यावसायिक परिचालन (कमर्शियल रन) शुरू कर दिया जाएगा।

अंडरग्राउंड रूट और डिपो सेक्शन में भी तेजी

एलिवेटेड रूट के साथ-साथ पटना जंक्शन से गांधी मैदान और मोइनुल हक स्टेडियम तक टनल निर्माण का काम भी तेजी से चल रहा है। पटना जंक्शन के पास अंडरग्राउंड स्टेशन का ढांचा तैयार किया जा रहा है, जबकि बाइपास और सगुना मोड़ इलाके में भी पिलर और स्ट्रक्चर का काम काफी आगे बढ़ चुका है।

ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत

पटना मेट्रो के शुरू होने से शहर के व्यस्ततम इलाकों में लगने वाले जाम से लोगों को निजात मिलेगी। यह न केवल यात्रा का समय कम करेगा, बल्कि प्रदूषण घटाने में भी सहायक सिद्ध होगा। अब सभी की निगाहें ट्रायल रन और रेल सुरक्षा आयुक्त की अंतिम मंजूरी पर टिकी हैं।

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