नींद हमारे शरीर और दिमाग के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी हवा, पानी और खाना। नींद के दौरान शरीर की मरम्मत होती है, दिमाग शांत रहता है और इमोशनल बैलेंस बना रहता है। लेकिन कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी नींद लेना अक्सर मुश्किल हो जाता है।

रिसर्च बताती है कि कैंसर के लगभग हर दूसरे मरीज को नींद से जुड़ी कोई न कोई समस्या होती है। दर्द और शारीरिक परेशानियां करती हैं नींद खराब
कैंसर शरीर और मन दोनों पर असर डालता है।


ट्यूमर की वजह से दर्द, सांस लेने में तकलीफ, खांसी, खुजली या पेशाब की समस्या हो सकती है। बार-बार दर्द और असहजता के कारण मरीज की नींद लगातार टूटती रहती है। बुखार और थकान भी नींद में बाधा डालते हैं, जिससे गहरी नींद नहीं मिल पाती।


कैंसर का इलाज आवश्यक है, लेकिन इसके कुछ दुष्प्रभाव नींद पर असर डालते हैं। कीमोथेरेपी, रेडिएशन, हार्मोन थेरेपी, स्टेरॉइड, दर्द निवारक और कुछ एंटीडिप्रेसेंट दवाएं रात में नींद में बाधा डाल सकती हैं। मतली, पसीना आना, गर्मी या पेट की परेशानियां रात में बढ़ जाती हैं, जिससे मरीज को सोने और सोए रहने में दिक्कत होती है।


कैंसर का नाम सुनते ही मरीज और उनके परिवार में डर, चिंता और भविष्य की फिक्र शुरू हो जाती है। इलाज का डर, मौत का डर या परिवार की चिंता दिमाग को इतना व्यस्त कर देती है कि आराम करना मुश्किल हो जाता है। यही तनाव अनिद्रा (Insomnia) की सबसे बड़ी वजह बन जाता है।























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