पटना: बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार पिछले एक साल से निशांत कुमार का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि ‘हमलोग चाहते हैं कि पार्टी में एक युवा चेहरा आए. बिहार की जनता की भी यही मांग है.’
युवा के हाथों में बिहार की पार्टियां
निशांत कुमार की राजनीति में आने की चर्चा लंबे समय से हो रही है, क्योंकि वर्तमान में ज्यादातर पार्टी की कमान युवा नेताओं के हाथ में है. बीजेपी ने 45 साल के नितिन नबीन को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है. इससे पहले हम (सेक्यूलर), लोजपा रामविलास, राजद की कमान युवा पीढ़ी ही संभाल रहे हैं.
‘खरमास के बाद निशांत की एंट्री’
बिहार ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी यही है. झारखंड में पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा की कमान हेमंत सोरेन ने संभाल लिया है. अब नीतीश कुमार के बेटे निशांत को लेकर भी चर्चा है कि खरमास के बाद जदयू में एंट्री ले सकते हैं. पार्टी के नेता कह रहे हैं कि युवा पीढ़ी को तो आना ही चाहिए. मंत्री से लेकर विधायक तक निशांत कुमार के स्वागत के इंतजार में हैं.
कौन हैं निशांत कुमार?
निशांत कुमार CM नीतीश कुमार के इकलौते बेटे हैं. BIT मेसरा से इजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले निशांत अपना व्यवसाय करते हैं. 49 साल की उम्र में कुंवारे हैं और अभी तक राजनीति से कोसो दूर हैं. हालांकि बिहार चुनाव के बीच कई बार मीडिया के सामने आ चुके हैं और पिता के काम की तारीफ की और वोट मांगे.

राजनीति में सक्रियता
निशांत अब तक राजनीति से दूरी बनाए हैं. इसको लेकर निशांत का बयान भी पहले आते रहा है कि राजनीति में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है. उनका झुकाव अध्यात्म की तरफ है. सामाजिक कार्य करने की बात भी करते रहे हैं, लेकिन पिछले दो सालों से उनकी राजनीति में सक्रियता दिखी है.

बिहार में पिछले 20 सालों से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं, लेकिन जदयू के उत्तराधिकारी की घोषणा अब तक नीतीश कुमार ने नहीं की है. बिहार में कई बड़े नेता के बेटे राजनीति में हैं. रामविलास के बेटे चिराग पासवान, लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव, जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन अपनी-अपनी पार्टी संभाल रहे हैं. हाल में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश भी मंत्री बन गए.

सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष से भी समर्थन
निशांत कुमार को लेकर विपक्ष के नेताओं की ओर से भी बयान आते रहते हैं कि निशांत को राजनीति में आना चाहिये. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा था कि हमारी पार्टी में भी युवा पीढ़ी तैयार है. पार्टी के वरिष्ठ नेता भी निशांत की वकालत करते दिख रहे हैं. बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार लंबे समय से स्वागत के लिए तैयार हैं.
निशांत को मनाने में लगे हैं नेता
मिथिलांचल क्षेत्र के बेनीपुर से जदयू के विधायक अजय चौधरी का भी कहना है कि हमलोग तो निशांत को मनाने में लगातार लगे हुए हैं. क्या निशांत सक्षम हैं परिवारवाद का कोई मामला तो नहीं? इसपर विधायक कहते हैं कि एकदम सक्षम हैं. ‘परिवारवाद का कोई मामला नहीं है. अगर नीतीश कुमार लाएंगे तब परिवारवाद होगा. निशांत खुद आएंगे तो इसमें क्या दिक्कत है. युवा हैं, उन्हें फैसला लेने का अधिकार है.’

‘सब उनके स्वागत के लिए तैयार’
जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि निशांत नवमी फेल नहीं है, पढ़े लिखे हैं. पिता नीतीश कुमार की तरह ही इंजीनियर हैं और राजनीति को समझते हैं. जब हमारे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने ही कह दिया है कि पार्टी में सब उनके स्वागत के लिए तैयार बैठा है. तो फिर इसके बाद कुछ बचा नहीं है.
निशांत की एंट्री क्यों जरूरी
जदयू के नेता भी कहते हैं कि पार्टी को बचाना है तो निशांत को लाना होगा. नीतीश कुमार लव कुश और अति पिछड़ा की राजनीति करते रहे हैं. यदि निशांत राजनीति में आते हैं तो यह वोट बैंक जदयू के साथ बना रहेगा. निशांत बीजेपी के लिये भी जरुरी हैं, क्योंकि पिछड़ा और अति पिछड़ा वोट बैंक एनडीए से छिटक न जाए इसका डर है.
बयानों को लेकर चर्चा में थे निशांत
विधानसभा चुनाव से पहले निशांत अपने बयानों को लेकर चर्चा में थे. सरकार के कामकाज से लेकर लोगों से लगातार अपील भी कर रहे थे कि एनडीए को जिताएं. रिजल्ट आने के बाद निशांत ने बयान भी दिया कि उन्हें अपने पिता पर विश्वास है. जो भी वादा किए हैं, उसे जरूर पूरा करेंगे. पहले भी सभी वादा को पूरा करते रहे हैं.
परिवारवाद बड़ा रुकावट
नीतीश कुमार हमेशा परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं. इसीलिए परिवार के किसी सदस्य को राजनीति में आने नहीं दिया. निशांत की एंट्री में परिवारवाद एक बड़ा रुकावट माना जाता रहा है, लेकिन नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर जिस प्रकार से चर्चा हो रही है. उसके बाद निशांत की एंट्री राजनीति में तय माना जा रहा है.











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