गया: बिहार के गया जी के सुदूरवर्ती फतेहपुर प्रखंड के बथान गांव के रहने वाले अजय यादव ने अपने संघर्ष और मेहनत से वो मुकाम हासिल की है, जिसकी चर्चा आज लोगों की जुबान पर है. सड़कों पर रिक्शा चलाने वाले बिहार के इस लाल ने देश सेवा करने की ठानी और सेना में चले गए. वहीं आज देश की शान बढ़ाते हुए पावरलिफ्टिंग में वर्ल्ड चैंपियन बन गए हैं. गुरुवार को फतेहपुर पहुंचने पर लोगों ने काफी उत्साह के साथ अपने चैंपियन का स्वागत किया.
बिहार के अजय ने रचा इतिहास
अजय ने रूस में इतिहास रचते हुए पावरलिफ्टिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है. इस चैंपियनशिप में 83 किलोग्राम भार वर्ग में 265 किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता है. फाइनल मुकाबले में उनके सामने ईरान था. ईरान को हराकर अजय ने जीत का परचम लहराया और अपने देश का मान बढ़ाया है.
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6 महीने में दूसरा गोल्ड मेडल
पिछले 6 महीने के भीतर अजय ने लगातार दूसरा स्वर्ण पदक जीता है. इससे पहले वियतनाम में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए पावरलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीता था. इस बार रूस में फिर से धमाल मचाते हुए कई देशों को पछाड़कर चैंपियन बने हैं. वहीं, अजय की जीत की जानकारी के बाद उनके गांव में खुशी का माहौल है. बता दें, कि रूस में 4 से 7 दिसंबर तक यह चैंपियनशिप चली थी.
ईरान से था फाइनल
अजय ने जबरदस्त प्रतिभा दिखाई और शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बना ली थी. फाइनल मुकाबले में भारत और ईरान के बीच मुकाबला हुआ. अजय ने 83 किलोग्राम भार वर्ग में 265 किलो किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीत लिया. इस तरह एक बार फिर से अजय यादव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम ऊंचा किया है.

रिक्शा चालक से बने इंटरनेशनल चैंपियन
इंटरनेशनल स्तर पर आज अजय यादव पावरलिफ्टिंग के बूते फेमस हो रहे हैं, लेकिन उनकी पिछली जिंदगी पर गौर करें, तो वह काफी संघर्षशील रही है. इतनी संघर्षशील कि उस पर ही जीत पाना काफी मुश्किल होता है. लेकिन अजय यादव ने हर मुश्किलों को मात देकर अपने आगे के सफर को आसान बनाया और आज पावरलिफ्टिंग क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नाम हैं.
पिता चलाते थे बैलगाड़ी
एकदम साधारण से परिवार से रहे अजय यादव के पिता रामबालक प्रसाद बैलगाड़ी चलाते थे. उनके परिवार की स्थिति काफी दयनीय थी. घर चलाना काफी मुश्किल था. पैसे के कारण अजय की शिक्षा भी प्रभावित हो रही थी. किसी तरह से सरकारी स्कूल में उनकी पढ़ाई पूरी हुई.

झुमरी तिलैया में चलाते थे रिक्शा
इस क्रम में छात्र जीवन में अजय यादव को रिक्शा तक चलानी पड़ी, मजदूरी भी की. अजय यादव अपने बथान गांव से सटे झारखंड के कोडरमा के झुमरी तिलैया जो कि पर्यटन स्थल भी है, वहां जाकर छात्र जीवन के दौरान रिक्शा चलाया करते थे और अपने घर स्थिति को मजबूती प्रदान करते थे.
2010 में सेना में चयन
उन्होंने संघर्ष के बीच सेना में जाने की तैयारी की और फिर आखिरकार 2010 में उनका चयन भारतीय सेना में हुआ था. भारतीय सेना में उनका चयन होने के बाद घर की आर्थिक स्थिति बदली. अजय यादव सेना में गए. उनकी शुरुआती पोस्टिंग असम में हुई.

ऐसे मिली पावरलिफ्टिंग की राह
अजय फिटनेस के लिए काफी मेहनत करते थे. उनके ट्रेनर ने उनकी क्षमता देखकर पावरलिफ्टिंग के क्षेत्र में मेहनत करने को कहा. पावरलिफ्टिंग के क्षेत्र में उन्होंने मेहनत शुरू की, तो सफलता मिलनी शुरू हो गई. 2016 से पावरलिफ्टिंग में कई तरह की सफलताएं मिली.










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