पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. एनडीए गठबंधन के सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने सीमित सीटों पर शानदार प्रदर्शन कर सभी को चौंका दिया है.
सफल हुई चिराग की मोलभाव की रणनीति
चुनाव घोषणा से पहले चिराग पासवान ने एनडीए के साथ सीटों को लेकर कड़ा रुख अपनाया था. भाजपा ने उन्हें मनाने के लिए भरपूर प्रयास किए, जिसमें बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान खुद उनकी मुलाकात करने पहुंचे थे. वहीं यह मोलभाव अब फलदायी साबित हो रहा है.

29 सीटों पर 22 में बढ़त का कमाल
चुनावी नतीजों में LJP (R) ने 29 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और इनमें से 22 पर मजबूत बढ़त बना ली है. चिराग का स्ट्राइक रेट इस बार असाधारण रहा, जो उन्हें बिहार की राजनीति में विजेता के रूप में स्थापित कर रहा है.
एनडीए का सीट बंटवारा फॉर्मूला
गठबंधन के तहत जदयू और भाजपा ने 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा. चिराग की पार्टी को 29 सीटें आवंटित की गईं, जबकि जीतन राम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को छह-छह सीटें मिलीं. यहां चिराग के लिए सुनहरा अवसर साबित हुआ.

2020 की तुलना में शानदार प्रदर्शन
साल 2020 में चिराग की पुरानी पार्टी ने गठबंधन से अलग होकर 135 सीटों पर लड़ाई लड़ी, लेकिन सिर्फ एक सीट जीती जो बाद में जदयू में विलय हो गई. इस बार एनडीए के साथ रहकर उन्होंने अपनी रणनीति को पूरी तरह बदल दिया.

भाजपा ने जताया खास भरोसा
भाजपा ने चिराग पर खास भरोसा जताया, भले ही पिछली विधानसभा में उनकी पार्टी का कोई विधायक नहीं था. वहीं 29 सीटें देकर एनडीए ने बड़ा दांव खेला, जिसे चिराग ने अपने प्रदर्शन से सार्थक ठहराया है.
बिहार की राजनीति में नया अध्याय
चिराग पासवान का यह उभार एनडीए की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. उनकी सफलता ने साबित कर दिया कि सही रणनीति और गठबंधन की ताकत से छोटे दल भी बड़ा असर डाल सकते हैं. बिहार की सियासत में चिराग अब एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरे हैं.









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