बिहार जल्द ही इंडस्ट्रियल हब के रूप में जाना जायेगा. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि पहली बार राज्य में उद्योग ने कृषि को पीछे छोड़ दिया. हर बार ऐसा होता था कि बिहार के विकास में एग्रीकल्चर सेक्टर का योगदान सबसे ज्यादा रहता था.

अब बिहार की तस्वीर बदल रही है और राज्य के विकास में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे आगे रह रहा है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की माने तो, बिहार में पिछले वित्तीय वर्ष में कृषि का योगदान 22.4 प्रतिशत रहा जबकि उद्योग का योगदान 23.2 प्रतिशत रहा.


इस तरह से बिहार में उद्योग का विकास देखा जा सकता है.आंकड़ों पर गौर करें तो, 2011-12 में बिहार के ग्रॉस वैल्यू असेट में कृषि का योगदान 25.7 प्रतिशत और उद्योग का योगदान लगभग 18.8 प्रतिशत था.


इसके बाद 2012-13 में उद्योग का योगदान घटकर 15.4 प्रतिशत तक पहुंच गया. लेकिन, कृषि का योगदान बढ़ा और 27.7 प्रतिशत पहुंचा. इसके बाद से कृषि का योगदान उद्योग से ज्यादा ही रहा. लेकिन, 2024-25 में बड़ा बदलाव देखने के लिए मिला.
















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