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अपनी गाड़ी का नंबर प्लेट दूसरी गाड़ी पर लगा देख जमकर हंगामा

मनियारी थाने की एएलटीएफ विंग की स्कॉर्पियो पर फर्जी नंबर प्लेट लगा था. इसी पर सवार होकर पुलिस शराब व माफियाओं के खिलाफ छापेमारी करती थी. पुराने एसएसपी कार्यालय के सामने शुक्रवार को असली स्कॉर्पियो मालिक ने अपनी गाड़ी का नंबर प्लेट दूसरी गाड़ी पर लगा देखा तो वह जमकर हंगामा करने लगा.

इसके बाद काफी संख्या में लोगों की भीड़ मौके पर जुट गयी. दोनों गाड़ी के चालकों में मारपीट की स्थिति उत्पन्न हो गयी. इस बीच पीआइआर पर मामले की सूचना मिलने के बाद तुरंत नगर थाने की पुलिस पहुंची.

दोनों गाड़ी व चालक को थाने ले आयी. छानबीन के दौरान पता चला कि वैशाली जिले के गोरौल थाना के बहादुरपुर निवासी मो. रिजवान ने स्कॉर्पियो 2017 में खरीदी थी. इसका आठ सितंबर 2017 को रजिस्ट्रेशन हुआ था. वहीं, दूसरी गाड़ी जिस पर मनियारी थाने की पुलिस चढ़ रही थी. वह सीतामढ़ी जिले के बैरगनिया थाना के सतपुरवा निवासी यासमीन के नाम पर है. मुजफ्फरपुर डीटीओ से इसका 30 सितंबर 2019 को रजिस्ट्रेशन है. यह गाड़ी ट्रांसपोर्टर विवेक राज लीज वाहन मालिक से लीज पर लेकर जिला पुलिस को दो साल पहले दिया था.

पिछले एक साल से यह गाड़ी मनियारी थाने में चल रही थी. लेकिन, उस गाड़ी पर जो नंबर प्लेट लगा था उसमें पीइ की जगह पीडी लिखा था. असली मालिक मो. रिजवान के भाई का कहना है कि उसकी गाड़ी कभी भी मनियारी नहीं गयी. वहां के टोल पर टैक्स कट गया था.

नगर थानेदार असली मालिक मो. रिजवान व ट्रांसपोर्टर से पूरे मामले में विस्तृत पूछताछ कर रहे हैं. मनियारी थानेदार देव व्रत कुमार ने बताया कि उनके थाने में एएलटीएफ में गाड़ी चलती है. उसी से शुक्रवार को कोर्ट का काम करने आये थे. गाड़ी ट्रांसपोर्टर से हायर किया गया है.

मो. रिजवान के भाई सनाउल्लाह ने बताया है कि उसका भाई सिलीगुड़ी में व्यवसायी है. उन्होंने 2017 में स्कॉर्पियो खरीदी थी. कुछ माह से उनकी गाड़ी का मनियारी में टोल टैक्स कट जाता था. जबकि उनकी स्कॉर्पियो कभी मनियारी नहीं गयी.

शुक्रवार को वे लोग जरूरी काम से शहर आये थे. यहां पुराने एसएसपी कार्यालय के समीप अपनी गाड़ी खड़ी की थी. इस बीच उनके ही स्कॉर्पियो का नंबर लगा एक दूसरी गाड़ी आयी उसपर पुलिस लिखा था. जब गाड़ी के नजदीक जाकर देखे तो उसका ही नंबर प्लेट लगा था. इसके बाद चालक से पूछा तो हंगामा करने लगा. फिर पुलिस को सूचना दी.


ट्रैवल एजेंसी संचालक विवेक राज ने बताया कि दोनों स्कॉर्पियो का नंबर में एक अंक का अंतर है. मानवीय भूल के कारण एक नंबर मिस प्रिंट हुआ है. वह पिछले कई साल से बिहार पुलिस व रेलवे को गाड़ी उपलब्ध करवाते आ रहे हैं. पहली बार इस तरह की घटना हुई है. मो. रिजवान की गाड़ी का जितना टोल टैक्स कटा है, वह भरने को तैयार है.

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