बिहार सरकार ने पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य की ग्राम पंचायतों में दो दर्जन से अधिक प्रकार के कर (टैक्स), शुल्क और फीस वसूली का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने पंचायतों द्वारा वसूले जाने वाले विभिन्न करों की अधिकतम दरें तय कर दी हैं। इनकी राशि 1 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक हो सकती है।
पंचायती राज विभाग के अनुसार, यह व्यवस्था बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा-27 के तहत पहले से ही मौजूद थी। अब सरकार ने विभिन्न मदों में अधिकतम कर और शुल्क की सीमा तय कर दी है, जिससे पंचायतें अपनी आय बढ़ाकर विकास कार्यों पर अधिक खर्च कर सकें।
नई व्यवस्था के अनुसार पंचायत क्षेत्र में बने निजी आवासीय भवनों पर होल्डिंग टैक्स लगाया जाएगा। पक्के मकान के लिए अधिकतम 100 रुपये सालाना, जबकि अर्द्धपक्के मकान पर 50 रुपये तक टैक्स लिया जा सकेगा। मिट्टी के घरों को इस कर से पूरी तरह छूट मिलेगी। प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत बने घरों पर 25 रुपये वार्षिक कर का प्रावधान किया गया है। हालांकि यह राशि संबंधित विभाग से ली जाएगी, लाभार्थियों से सीधे नहीं।
व्यावसायिक, औद्योगिक और संस्थागत उपयोग वाले भवनों पर 100 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक वार्षिक कर लगाया जा सकेगा। इसके अलावा पंचायत क्षेत्र में संचालित कई व्यवसायों पर भी अलग-अलग शुल्क तय किए गए हैं।सिनेमा हॉल, विवाह भवन, होटल, पेट्रोल पंप और रसोई गैस एजेंसी जैसे प्रतिष्ठानों से सालाना अधिकतम 5,000 रुपये तक शुल्क लिया जा सकेगा। वहीं दो टन प्रति घंटा से अधिक क्षमता वाले राइस मिल और अन्य बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी कर के दायरे में आएंगे।














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