दीपावली का पर्व आते ही हर जगह उत्साह और रोशनी का माहौल बन जाता है. इस खास त्योहार में घरों और आंगनों को दीयों से सजाना एक पुरानी परंपरा है, जो सुख, समृद्धि और खुशियों का प्रतीक मानी जाती है. दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है ताकि घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास हो. इस दिन की एक खास परंपरा है ‘डायन दीया’ जलाना, जिसे घर के बाहर चौखट पर रखा जाता है. मान्यता है कि डायन दीया जलाने से घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं कर पातीं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है.



दीपावली से जुड़े कई पौराणिक मान्यताओं के अनुसार डायन दीया जलाने से घर के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनता है, जिससे बुरी शक्तियां घर में नहीं आ पातीं. डायन दीया खास तौर पर कुम्हारों द्वारा बनाया जाता है और हर साल इसकी बाजार में काफी मांग रहती है. डायन दीया कैसे बनता है, इस पर ध्यान दें तो यह दीया मिट्टी की एक महिला आकृति के रूप में बनाया जाता है, जिसमें पांच छोटे-छोटे दीयों को जलाने की जगह होती है. इन दीयों में घी डालकर जलाया जाता है, जो पांच तत्वों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का प्रतिनिधित्व करते हैं. दिवाली की रात को इस दीये को मुख्य दरवाजे पर जलाया जाता है ताकि घर में बुरी शक्तियां प्रवेश न कर सकें और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे.














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