मुजफ्फरपुर जिले के गोला रोड में 11 नवंबर शनिवार को श्री बाबू अयोध्या प्रसाद खत्री साहित्यिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में 174 वां द्वितीय मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन श्री गांधी पुस्तकालय परिसदन में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सत्येन्द्र कुमार सत्येन, मंच संचालन सहज कुमार और धन्यवाद ज्ञापन आलोक कुमार अभिषेक द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रकाश के पर्व दीवाली सहित विविधरसों की सृष्टि काव्यों एवं मुशायरों में दृष्टिगत हुई ।
- डा० लोक नाथ मिश्रा:- मुख्य साहित्यकारों की रचना पूर्णमासी की संपूर्ण कलाओं के साथ , अपनी धवल चांदनी से सागर को नहलाने वाला।
- आलोक कुमार अभिषेक: – गणेश लक्ष्मी पूजन करें गम को मिटाने आई दीवाली, आत्मा की ज्योति जलाकर लाएं घर-घर मे खुशहाली ।
- सहज कुमार:- शहर में डर का माहौल है घर मे डर का माहौल हैं, क्यों डर की छाया है, क्या चुनाव आया है ?
- उमेश राज:- दीपक के तरह जलना सीखो सूरज के तरह तपना सीखो
- सुमन कु. मिश्र:- मन में लिए उमंग जग का, तम मिटाने, आ गई फिर दीवाली आ गई।
- अंजनी कुमार पाठक:- आओ दीप जलायें ! घर आंगन से, दिरा दिगन्त तक तम को दूर भगाये
- अरुण कुमार तुलसी:- दोनो ओर प्रेम पलता है सखी पतंग भी, जलता है। दीपक भी जलता है
- शशि रंजन वर्मा:- हम सब मिलकर दीप जलाकर दीपावली मनायेंगे, साफ सफाई रंग रोगन कर रेगोली सजायेंगे।
- रघुनाथ मुहब्बत पुरी: सुंदर हमर देश भूमि जंगल पहाड़ वा, हमर मन बसे नदी खेत पधार हो जवानवा
- मधुकर वनमाले:- झिलमिल दीपजले तारो सम, तिमिर नदी में पतवारों सम








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