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गलवान घाटी पर चीन के दावे के बाद भारत ने क्या कहा

भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हुई हिंसा को लेकर चीन के बयान के बाद अब भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय सेना ने कभी लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल के उल्लंघन की कोशिश नहीं की.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के अनुसार  , “गलवान घाटी एरिया को लेकर भारत की स्थिति ऐतिहासिक तौर पर स्पष्ट है. चीन की तरफ से लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल को लेकर बढ़चढ़ कर ऐसे दावे किए गए हैं जो कतई स्वीकार्य नहीं हैं. ये दावे पूर्व में इस जगह को लेकर खुद चीन की स्थिति से अलग हैं.”

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि गलवान घाटी समेत भारत-चीन के लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल से सटे सभी इलाक़ों की भारतीय सेना को पूरी समझ है और वो इसका पूरा सम्मान करते हैं. भारतीय सेना ने कभी भी लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल के उल्लंघन की कोशिश नहीं की.

सच कहा जाए तो वो लंबे वक्त से इस इलाक़े में बिना किसी दुर्घटना के गश्त करते रहे हैं. साथ ही भारतीय सेना ने जो भी निर्माण कार्य किया है वो लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल की इस तरफ़ है.

बयान में कहा गया है कि मई महीने की शुरुआत से ही चीनी सैनिक भारत के गश्त के पैटर्न में रुकावट पैदा कर रहे थे जिस कारण टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई. ऐसे में मौजूदा द्विपक्षीय समझौतों के तहत ग्राउंड कमांडर ने स्थिति संभाली.

भारत लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल में स्थिति में एकतरफ़ा बदलाव करने के आरोप को कतई स्वीकार नहीं करता, भारत ने हमेशा इस यथास्थिति को बनाए रखने की कोशिश की है.

मई महीने के मध्य में चीन ने सीमा पर पश्चिमी सेक्टर में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल का उल्लंघन करने की कोशिश की जिसका उन्हें उचित जवाब दिया गया. इसके बाद सीमा पर तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों में सैन्य स्तर पर और कूटनीतिक स्तर पर भी बात हुई और 6 जून 2020 को वरिष्ठ कमांडरों की बैठक हुई.

दोनों पक्ष लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल का सम्मान करने के लिए सहमत हुए और इस बात पर भी आम राय बनी कि स्थिति बदलने वाला कोई कदम नहीं उठाया जाएगा.

लेकिन गलवान घाटी इलाक़े को लेकर चीन इस सहमति का सम्मान नहीं कर सका और लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल के ठीक नज़दीक निर्माण कार्य शुरु किया. जब उन्हें ऐसा करने से रोका गया तो 15 जून को उन्होंने हिंसक क़दम उठाए जिसमें 20 भारतीय सैनिकों की मौत हो गई.

इसके बाद भारतीय विदेश मंत्री ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से बात की और कड़े शब्दों में अपना विरोध जताया. उन्होंने चीन के लगाए आरोपों से इनकार किया और कहा कि चीन वरिष्ठ कमांडरों की बैठक में जो सहमति बनी थी चीन उससे पीछे हट रहा है.

इस पूरे मामले को ज़िम्मेदारी के साथ सुलझाने पर दोनों मंत्रियों में सहमति बन गई है. दोनों देश सैन्य स्तर पर और कूटनीतिक स्तर पर इस मुद्दे पर बात कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि दोनों देशों के विकास के लिए और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए चीन दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बात का सम्मान करेगा.

चीन ने किया था गलवान घाटी पर अधिकार का दावा

इससे पहले चीन ने कहा था कि कि उसकी हिरासत में कोई भारतीय नहीं है. चीन ने ये भी कहा था कि समूची गलवान घाटी उसके अधिकार क्षेत्र में है.

चीन के विदेश मंत्रालय की रोज़ाना प्रेस वार्ता में एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता झाओ लीजियान ने कहा कि, “जहां तक मुझे जानकारी है, इस समय चीन की हिरासत में कोई भारतीय सैनिक नहीं है.”

हालांकि, उन्होंने भारतीय सैनिकों को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि नहीं की.

भारतीय मीडिया की रिपोर्टों में कहा गया है कि चीन ने 15-16 जून की रात को हुई हिंसक झड़प के बाद भारत के चार अधिकारी और छह जवानों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था जिन्हें गुरुवार शाम छोड़ा गया है.

इस हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक मारे गए थे जिनमें एक कर्नल भी शामिल थे.

जब चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से गलवान घाटी में हुए घटनाक्रम के बाद भारत में चीन के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों और चीन के सामान के बहिष्कार की अपीलों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि गलवान में जो कुछ हुआ है उसकी ज़िम्मेदारी भारत की है.

उन्होंने कहा कि दोनों ही दैश सैन्य और कूटनीतिक चैनलों के ज़रिए बातचीत कर रहे हैं और तनाव कम करने पर ज़ोर दे रहे हैं.

उन्होंने कहा, “चीन भारत के साथ रिश्तों को महत्व देता है और उम्मीद करता है कि भारत चीन के साथ मिलकर दूरगामी विकास के लिए द्विपक्षीय रिश्ते बेहतर करने के लिए काम करेगा.”

गलवान घाटी पर चीन ने क्या कहा, पढ़ें पूरा बयान

पूरी गलवान घाटी भारत-चीन सीमा के पश्चिमी सेक्शन में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन की ओर है. कई सालों से चीन के सैनिक इस क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं.

इस साल अप्रैल के बाद से लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल पर गलवान घाटी में भारतीय सेना ने एकतरफ़ा कार्रवाई करते हुए लगातार सड़कें बनाई हैं, पुल और अन्य ठिकाने बनाए हैं.

चीन ने कई बार शिकायत की लेकिन भारत ने और उकसाने वाली कार्रवाई करते हुए एलएसी को पार किया.

6 मई की सुबह को एलएसी पार करने वाले सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों ने, जो रात में एलएसी पार करके चीन के क्षेत्र में आ गए थे, बैरिकेड लगाए और क़िलेबंदी की जिससे सीमा पर तैनात चीन के सैनिकों की गश्त में अवरोध पैदा हुआ.

भारतीय सैनिकों ने जानबूझकर उकसावे वाली कार्रवाई करते हुए प्रबंधन और नियंत्रण की यथास्थिति को बदल दिया.

चीन के सैनिक परिस्थिति से निपटने के लिए और ज़मीन पर अपने प्रबंधन और नियंत्रण को मज़बूत करने के लिए ज़रूरी क़दम उठाने के लिए मजबूर हो गए.

तनाव कम करने के लिए भारत और चीन ने सैन्य और कूटनीतिक चैनलों से बातचीत की. चीन की मज़बूत मांगों की प्रतिक्रिया में भारत एलएसी पार करने वाले अपने सैनिकों को वापस बुलाने और बनाए गए ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए तैयार हो गया. भारत ने ऐसा किया भी.

06 जून को दोनों पक्षों में कमांडर स्तर की वार्ता हुई और तनाव कम करने पर सहमति बन गई. भारतीय पक्ष इस बात पर सहमत हुआ कि वह गलवान नदी को पार नहीं करेगा और दोनों ही पक्ष ज़मीन पर मौजूद कमांडरों के बीच बैठकों के ज़रिए सैनिकों को चरणबद्ध तरीक़े से हटाएंगे.

लेकिन 15 जून की रात को सीमा पर तैनात भारतीय सैनिक कमांडर स्तर की बैठक में हुए समझौते का उल्लंघन करते हुए एक बार फिर एलएसी पार कर गए. जब गलवान घाटी में तनाव कम हो रहा था, उन्होंने जानबूझकर उकसावे की कार्रवाई की.

चीन के जो सैनिक और अधिकारी वार्ता करने के लिए उनके पास गए उन पर उन्होंने हिंसक हमला किया जिससे भीषण हिंसा हुए और लोग हताहत हुए

भारतीय सेना की इस दुस्साहसिक कार्रवाई ने सीमा क्षेत्र की स्थिरता को कमज़ोर किया है, चीन के सैनिकों की जान को ख़तरे में डाला है, सीमा विवाद पर दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन किया है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन किया है.

चीन ने भारत के समक्ष अपना पक्ष रखा है और इसका पुरज़ोर विरोध किया है.

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ फ़ोन पर हुई वार्ता में विदेश मंत्री वांग यी ने भारत से कहा है कि इस घटना की गंभीरता से जांच की जाए, ज़िम्मेदार लोगों को सख़्त सज़ा दी जाए और सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों को अनुशासित किया जाए और तुरंत सभी उकसावे की कार्रवाइयां बंद की जाएं ताकि ऐसी घटनाएं फिर ना हों.

ज़मीन पर हालात को सुधारने के लिए जल्द ही कमांडरों के बीच दूसरी बैठक भी होगी. गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद पैदा हुए गंभीर हालातों से निबटने के लिए दोनों ही पक्ष न्यायपूर्ण तरीक़े से काम करेंगे, कमांडर स्तर की बैठक में तय हुए समझौते का पालन करेंगे और हालात को जल्द से जल्द शांत करेंगे और अब तक हुए समझौते के तहत सीमावर्ती क्षेत्र में शांति स्थापित करेंगे.

इससे पहले भारत ने क्या कहा था?

भारत-चीन सीमा पर हालिया घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हुई सर्वदलीय बैठक में कहा कि ना कोई हमारे क्षेत्र में घुसा है और ना किसी पोस्ट पर क़ब्ज़ा किया गया है.

पीएम मोदी ने कहा कि भारत शांति और दोस्ती चाहता है लेकिन वो अपनी संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”अभी तक जिनसे कोई सवाल नहीं करता था, जिन्हें कोई नहीं रोकता था, अब हमारे जवान उन्हें कई सेक्टर्स में रोक रहे हैं, चेतावनी दे रहे हैं.”

हालांकि इसके एक दिन बाद शनिवार को प्रधानमंत्री कार्यालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर स्पष्टीकरण दिया और कहा कि सीमा विवाद के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक में दिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को कुछ हलकों में तोड़मरोड़ कर पेश किया जा रहा है.

बयान के अनुसार सरकार एलएसी में एकतरफ़ा बदलाव की कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी.

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