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प्रदर्शन के दौरान मरने वाले किसानों का कोई रेकॉर्ड नहीं,मुआवजे की मांग पर बोली सरकार..

कृषि क़ानूनों के खिलाफ प्रदर्शन 9 अगस्त 2020 को शुरू हुआ।जिसमें कृषि क़ानूनों का विरोध करने वाले 700 से ज्यादा किसान अब तक जान गंवा चुके हैं।केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को संसद में बताया है कि सरकार के पास दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान मरने वाले किसानों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

Interview of Agriculture Minister Narendra Singh Tomar on farmers' protest  against agriculture law : Outlook Hindi

विपक्ष की ओर से मृतक किसानों के परिवारों को आर्थिक मुआवजा दिए जाने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चूंकि सरकार के पास किसानों की मौत का कोई रिकॉर्ड नहीं है, ऐसे में आर्थिक सहायता देने का सवाल ही नहीं उठता।किसान नेताओं का लंबे समय से यह दावा है कि सिंघु, टिकरी और गाजीपुर सीमा पर लगातार कृषि कानूनों का विरोध करने वाले 700 से ज्यादा किसान अब तक जान गंवा चुके हैं। यह मौतें मुख्य रूप से मौसम की मार, गंदगी के कारण होने वाली बीमारियों और आत्महत्या के कारण हुई हैं।

खबरों के मुताबिक, इस बीच आंदोलनकारी किसान अपनी मांगों पर अड़े हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने मांग की है कि सरकार बाकी लंबित मुद्दों पर किसान नेताओं के साथ बातचीत करे। तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने वाले बिल के पास होने के बावजबद संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार एमएसपी पर कानूनी बनाने की उनकी मांग को स्वीकार नहीं करती है।

किसानों ने यह भी मांग की है कि प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुए पुलिस केस भी वापस लिए जाएं और इस दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा मिले।किसानों ने दावा किया है कि मंगलवार को केंद्र सरकार ने एमएसपी सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए उनसे पांच प्रतिनिधियों के नाम मांगे हैं।

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