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भीषण अगलगी की घ’टनाओं से जिले कि बड़े अस्पताल नहीं ले रहे सबक, गैस के चूल्हे जला देते ख’तरों को निमंत्रण

देश और सूबे के कई अलग-अलग हिस्सों में भीषण अगलगी की घ’टनाओं से भी जिले कि बड़े अस्पताल सबक नहीं ले रहे हैं। अस्पताल के वार्डों में गैस सिलेंडर के उपयोग पर रोक के बावजूद धड़ल्ले से खतरनाक चूल्हे जलाये जा रहे हैं। कहीं मरीज के परिजन वार्ड के अंदर गैस सिलेंडर जला रहे हैं तो कहीं वार्ड के बगल में ही गैस जलाकर मरीजों के लिए खाना बना रहे हैं। अधिकारी-कर्मचारी भी आंखें मूंद ले रहे हैं। मंगलवार को एसकेएमसीएच व सदर अस्पताल में हिन्दुस्तान टीम की पड़ताल में यह सच्चाई सामने आई।

एसकेएमसीएस में इमरजेंसी वार्ड से कुछ दूरी पर मोटर गाड़ियां मिलीं। वहां कई सारे गैस के सिलेंडर के साथ खाना बनाने के बर्तन बोरे में रखे मिले। वर्षा के बीच वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजन गैस सिलेंडर की देखरेख करने बारी-बारी से आ रहे थे। यही हाल सदर अस्पताल का भी दिखा। यहां पुरुष वार्ड में कई मरीजों के परिजन बेड के ठीक नीचे  गैस सिलेंडर रखे मिले। पूछने पर परिजनों ने कहा कि वार्ड में ही थोड़ी देर के लिए गैस चूल्हा जलाकर गर्म पानी कर लेते हैं। वहीं वार्ड के नर्स व कर्मचारियों ने बताया कि गैस सिलेंडर लाने के लिए सभी मरीजों के परिजनों को मना किया गया है मगर वे बात नहीं मानते हैं। वार्ड के बाहर ही गैस चूल्हे जलाये जाते हैं। ये लोकल मेड होते हैं जिससे कभी भी कोई बड़ा हा’दसा हो सकता है।

सिर्फ दीवार पर ही है आदेश   
सदर अस्पताल में गैस सिलेंडर का उपयोग नहीं करने का नोटिस दीवार पर चस्पाया गया है। यहां इस आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस नोटिस में लिखा हुआ है कि वार्ड में गैस सिलेंडर रखना व खाना बनाना कानूनी तौर पर सख्त मना है। इससे अस्पताल में आग लगने की आशंका है। ऐसा करने वालों को पकड़े जाने पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए उनके विरूद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वार्ड में गैस चूल्हा जलाने की मनाही है। अस्पताल प्रबंधक व अधीक्षक को इस पर रोक लगाने को कहा गया है। फिर भी गैस सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा है तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
 – शैलेश प्रसाद सिंह, सिविल सर्जन

मरीजों को खुद से गैस सिलेंडर रख वार्ड में खाना बनाने से मना किया गया है। भर्ती मरीजों के परिजन को अलग सुरक्षित स्थान पर सात रुपये प्रति घंटे के हिसाब से गैस और बर्तन भी उपलब्ध कराया जाता है। फिर भी नहीं मानते जबकि सख्त मनाही है।
– सुनील कुमार शाही, अधीक्षक , एसकेएमसीएच

(इस खबर को  मुजफ्फरपुर न्यूज़ टीम ने संपादित नहीं किया है. यह हिन्दुस्तान  फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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