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मुजफ्फरपुर नए पीक की ओर:140 कोरोना पॉजिटिव मिले, रामनवमी जुलूस निकालने पर रोक, चैती छठ भी घरों में ही मनाने की प्रशासन की हिदायत

मुजफ्फरपुर में काेराेना नए पीक की ओर तेजी से बढ़ रहा है। गुरुवार काे 140 नए मरीज मिले। वहीं, पटना में 743 नए मरीज मिले। इतनी बड़ी संख्या पूरे काेराेना काल में दूसरी बार ही सामने आई है। इससे पहले आठ अगस्त 2020 काे पटना में सर्वाधिक 850 पाॅजिटिव मिले थे। अप्रैल में लगातार काेराेना संक्रमण बढ़ने से राजधानी के अस्पतालाें में बेड भी फूल हाे गए हैं।

यह समस्या पटना एम्स और शहर के दाे बड़े निजी अस्पतालाें पारस और रूबन में सामने आई है। इसके कारण पटना प्रशासन ने एम्स और ईएसआई बिहटा काे फिर से कोरोना डेडिकेटेड अस्पताल बनाने का प्रस्ताव भेजा है।

वर्तमान में एम्स में 112 बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित है। सभी फूल हो गए हैं। अनुरोध स्वीकार होने के बाद एम्स में 450 काेराेना मरीजों का इलाज हो सकेगा। वहीं ईएसआई बिहटा में अभी 50 बेड के साथ 12 आईसीयू बेड कोरोना मरीज के लिए आरक्षित है। डेडिकेटेड होने के बाद 500 बेड के साथ 125 आईसीयू बेड भी उपलब्ध हाे जाएंगे।

हालांकि, शुक्रवार से कोरोना मरीजों को बिहटा भेजने का कार्य शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही पीएमसीएच और एनएमसीएच में 100-100 बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित हैं। आवश्यकता बढ़ने पर बेड की संख्या बढ़ायी जाएगी। डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि केस बढ़ने के कारण सार्वजनिक जगहों पर कार्यक्रम आयोजित करने पर रोक लगायी गयी है। जिले में रामनवमी जुलूस नहीं निकला जाएगा। चैती छठ श्रद्धालु घरों पर करेंगे।

आईजीआईएमएस : 12 से ओपीडी के लिए सिर्फ ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, एक घंटे में सभी विभागों में 10 मरीज देखें जाएंगे
कोरोना संक्रमण को देखते हुए 12 अप्रैल से ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन बंद हो जाएगा। मरीज को अब ओपीडी में दिखाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा। इमरजेंसी सेवा पहले जैसा ही बहाल रहेगी। मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल के मुताबिक हर विभाग में प्रत्येक घंटे 10 मरीज ही देखे जाएंगे।

मुख्यमंत्री का निर्देश

पटना, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बाहर से आने वाले हर व्यक्ति की कोरोना जांच होगी। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी उन्हें कुछ दिन तक अलग रखा जाएगा। वे गुरुवार को 2019 बैच के प्रशिक्षु आईएएस अफसरों से बात कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा-8 राज्यों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके कारण काम बंद होगा, तो फिर लोग वापस अपने घर आयेंगे। उनके लिए क्वारंटाइन सेंटर और रोजगार का प्रबंध किया जा रहा है।

उन्होंने अफसरों को विस्तार से बताया कि बिहार में कोरोना से बचाव के लिए क्या-क्या हुआ; कैसे इस चुनौती को अवसर में बदलने की कोशिश हुई; और इसके कितने सार्थक नतीजे रहे। उनके अनुसार लॉकडाउन के दौरान लोगों को हरसंभव मदद दी गई।

बाहर से आने वालों के लिए क्वारेंटाइन सेंटर बना, उनके लिए काम के अवसर निकाले गये। कोरोना से मौत का राष्ट्रीय औसत 1.3 फीसदी है, जबकि बिहार में सिर्फ 0.5 है। टेस्टिंग में प्रति 10 लाख की संख्या पर देश की औसत जांच दर से बिहार में 8 हजार ज्यादा जांच कराई गयी।

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