बिहार में बढ़ते साइबर अ’पराध, डिजिटल अरे’स्ट और ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉ’ड पर लगाम लगाने के लिए पटना जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। अब सिम कार्ड की खरीद-बिक्री पहले से ज्यादा सख्त निगरानी में होगी। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई सिम विक्रेता तय नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही हर थाने में साइबर हेल्पडेस्क शुरू करने और स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने की भी तैयारी है।
जिला प्रशासन की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी थाना क्षेत्रों में सिम कार्ड बेचने वाले दुकानदारों पर नियमित निगरानी रखी जाए। सिम जारी करने के दौरान ग्राहक का सत्यापन और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा। यदि किसी दुकान पर नियमों की अनदेखी पाई जाती है, तो संबंधित विक्रेता के खि’लाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का मानना है कि फ’र्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी होने वाले सिम कार्ड साइबर अपरा’धियों के लिए सबसे बड़ा हथि’यार बनते जा रहे हैं। इसलिए इस कड़ी को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
साइबर अप’राध रोकने के लिए नई रणनीति
बैठक में साइबर अपरा’धियों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठ’गी और बैंक फ्रॉ’ड जैसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि पी’ड़ितों को जल्द राहत मिल सके और अपरा’धियों तक तेजी से पहुंचा जा सके।
लोगों को साइबर ठ’गी की शिकायत दर्ज कराने में आसानी हो, इसके लिए जिले के सभी थानों में साइबर हेल्पडेस्क स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यहां पी’ड़ितों को शिकायत दर्ज कराने, आवश्यक सलाह लेने और आगे की प्रक्रिया की जानकारी एक ही स्थान पर मिलेगी।इसके अलावा जिला स्तरीय बैंकिंग समन्वय समिति की बैठकों में भी अब साइबर अप’राध और बैंक फ्रॉ’ड के मामलों की अलग से समीक्षा की जाएगी, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।









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