सीतामढ़ी: ”अभियंता, सहायक अभियंता, कनिय अभियंता के नाजायज गठजोड़ के कारण निर्माण एजेंसी ने लगभग 5000 हाइवा मिट्टी निकाला है. मैंने इसकी शिकायत डीएम से की थी. डीएम के निर्देश पर कार्यपालक अभियंता आए हैं. इन्होंने इस बात को कबूल किया कि मिट्टी काटी गई है. मैंने पूछा यह जस्टिफाइड है या नहीं, तब इन्होंने कहा कि इसपर मैं तीन दिन में बोलूंगा. मेरा साफ आरोप है कि जब कार्यपालक अभियंता साक्ष्य को सामने देखते हुए नकार रहे हैं, इसका मतलब है कि इस आर्थिक अपराध में वो और उनकी टीम शामिल है. ऐसे में कार्यपालक अभियंता इस जन अदालत में अभी से बंधक हैं.” यह कहना है बीजेपी विधायक बैद्यनाथ प्रसाद का.

सीतामढ़ी में इंजीनियर को बंधक बनाया
दरअसल, बिहार के सीतामढ़ी में अवैध खनन का मामला अक्सर ही सुर्खियों में आता रहता है. ताजा मामला जल संसाधन विभाग से जुड़ा हुआ है. मिट्टी घोटाले के आरोपों को लेकर हालात अचानक बेकाबू हो गए. बीजेपी विधायक बैद्यनाथ प्रसाद के आरोपों की जांच करने पहुंचे जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता और उनके साथ मौजूद कई जूनियर इंजीनियरों को ग्रामीणों और बीजेपी विधायक ने बंधक बना लिया.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सीतामढ़ी जिले के सुप्पी प्रखंड अंतर्गत जमला इलाके का है. विधायक और ग्रामीणों का आरोप है कि तटबंध मरम्मत के नाम पर बड़े पैमाने पर अवैध मिट्टी कटाई की गई. करोड़ों रुपये की मिट्टी को विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से संवेदकों द्वारा बेच दिया गया. मौके पर स्थानीय विधायक ने आरोप लगया कि जिस तटबंध की मरम्मत होनी थी, वहां नियमों को ताक पर रखकर जेसीबी मशीनों से मिट्टी काटी गई और ट्रैक्टरों के जरिए उसे बाहर भेजा गया.

DM से की गई थी शिकायत
इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी विधायक बैद्यनाथ प्रसाद ने पहले ही सीतामढ़ी के जिलाधिकारी रिची पांडेय से लिखित शिकायत की थी. शिकायत के बाद जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम जांच के लिए मौके पर पहुंची. लेकिन जांच से असंतुष्ट ग्रामीणों और विधायक ने अधिकारियों को घेर लिया और जवाबदेही की मांग करते हुए उन्हें जाने नहीं दिया.

स्थिति को सामान्य करने की कोशिश
मौके पर भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद हैं और माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है. सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन के वरीय अधिकारी भी मौके पर पहुंच रहे हैं और लोगों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया जा रहा है. फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है. हालांकि जल संसाधन विभाग के अधिकारी किसी भी तरीके के अनियमितता की बात इनकार कर रहे हैं.

जांच कर कार्रवाई का आश्वासन
इधर मामले को लेकर एसडीपीओ सदर राजीव रंजन सिंह ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है. मामले की जानकारी लेकर इस मामले में जो भी दोषी होंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी. जल संसाधन विभाग के द्वारा कार्य कराया जा रहा है. अगर सरकार के गाइडलाइन के अनुसार जल संसाधन विभाग के द्वारा कोई भी अवैध काम कराया जाएगा तो कार्रवाई की जाएगी.







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