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शास्त्री नगर की चित्रगुप्त मंदिर गली में बंगाली विधि-विधान से सजी सरस्वती पूजा, कलाकार की अनूठी साधना बनी आकर्षण का केंद्र

मुजफ्फरपुर : “या कुन्देन्दु तुषार हार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता…” ज्ञान, विद्या और संगीत की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती की आराधना में इन दिनों पूरा मुजफ्फरपुर डूब गया। वहीं खड़ी भंडार, शास्त्री नगर स्थित चित्रगुप्त मंदिर गली में सरस्वती माँ की पूजा बंगाली विधि-विधान के साथ श्रद्धा और भक्ति के भाव से की गई। बता दें कि यहां 2001 से ही निरंतर जाने-माने कलाकार राहुल कुमार द्वारा किया जा रहा है। इस पूजा पंडाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि राहुल कुमार स्वयं अपने हाथों से माँ सरस्वती का साज-सिंगार करते हैं और पूरे पूजा पंडाल की सजावट शुद्ध बंगाली थीम पर की जाती है।

जिसमें प्रतिमा, अलंकरण, पुष्प-सज्जा और रंग-रूप बंगाल की सांस्कृतिक छटा बिखेरते हैं।  चार दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में जागरण, भव्य आरती और भंडारे का विशेष आयोजन होता है।

जिसमें बूंदिया, खीर, खिचड़ी सहित माता को अर्पित विभिन्न प्रकार के प्रसाद का वितरण किया जाता है।आरती के समय माँ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है।

वहीं आयोजक राहुल कुमार बताते हैं कि यह पूजा केवल एक आयोजन नहीं बल्कि आस्था और साधना है, जिसका उद्देश्य बंगाली परंपरा और संस्कृति को जीवंत रखना है। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विशाल, वैष्णवी, मनीष, विकास, पंकज और जिशु समेत कई सहयोगियों का अहम योगदान रहा है।

जिसके कारण शास्त्री नगर की यह सरस्वती पूजा ज्ञान, कला और संस्कृति के संगम के रूप में पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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