मुजफ्फरपुर : जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राजद (RJD) की श्रद्धांजलि सभा उस समय रणक्षेत्र में बदल गई, जब पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपने ही नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शहर के बीबीगंज स्थित एक निजी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मंच पर राजद के कई कद्दावर नेता और पूर्व विधायक बैठे थे, तभी सामने मौजूद कार्यकर्ताओं ने ‘गद्दार’ के नारे लगाते हुए भारी हंगामा शुरू कर दिया। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद उपजा यह आक्रोश पार्टी की अंदरूनी कलह को सरेआम कर गया।

‘गद्दारों’ को मंच पर देख भड़के कार्यकर्ता
कार्यक्रम का नेतृत्व राजद के जिलाध्यक्ष रमेश गुप्ता कर रहे थे। जैसे ही श्रद्धांजलि सभा शुरू हुई, अचानक आधा दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं ने शोर मचाना और नारेबाजी करना शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप था कि मंच पर उन लोगों को जगह दी गई है, जिन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों को हराने के लिए ‘गद्दारी’ की थी। कार्यकर्ताओं ने चिल्लाते हुए पूछा कि “पार्टी को हराने वालों को मुख्य अतिथि क्यों बनाया गया?”

जिलाध्यक्ष की कोशिशें नाकाम
हंगामा बढ़ता देख जिलाध्यक्ष रमेश गुप्ता ने कार्यकर्ताओं को शांत कराने की काफी कोशिश की। उन्होंने मंच से माइक के जरिए अनुशासन की दुहाई दी, लेकिन आक्रोशित कार्यकर्ता कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे। वे लगातार उन नेताओं को मंच से उतारने की मांग कर रहे थे, जिन पर चुनाव के दौरान भीतरघात करने का संदेह था। इस दौरान मंच पर बैठे पूर्व विधायकों और पदाधिकारियों के चेहरे पर भी असहजता साफ देखी गई।

हार का दर्द और भीतरघात का आरोप
नारेबाजी कर रहे राजद कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे दिन-रात मेहनत करके पार्टी को मजबूत करते हैं, लेकिन कुछ बड़े नेता निजी स्वार्थ में पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ काम करते हैं। कार्यकर्ताओं ने दोटूक कहा कि जिन्होंने चुनाव में पीठ में छुरा घोंपा, उन्हें मंच पर बिठाया जाना ईमानदार कार्यकर्ताओं का अपमान है। यह विरोध काफी देर तक चलता रहा, जिससे कार्यक्रम की गरिमा पर भी सवाल खड़े हुए।

संगठन में दरार आई सामने
यह घटना दर्शाती है कि मुजफ्फरपुर राजद में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। विधानसभा चुनाव की हार का गुस्सा अभी भी कार्यकर्ताओं के मन में है। कर्पूरी ठाकुर की जयंती जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर हुई इस गुटबाजी ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि यदि समय रहते इन मतभेदों को दूर नहीं किया गया, तो आगामी चुनावों में पार्टी को और अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।










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