बिहार : शिक्षा के मंदिर में दो दशकों तक झूठ की नींव पर खड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा आखिरकार बेनकाब हो गया है। पश्चिमी चंपारण के भितहा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर-1 में प्रधान शिक्षिका के पद पर तैनात कुमारी मुन्नी गुप्ता वर्षों से अपनी सगी छोटी बहन कुमारी अनीता गुप्ता की पहचान और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी कर रही थीं। विभागीय रिकॉर्ड में ‘अनीता’ बनकर वेतन और पद का लाभ उठाने वाली मुन्नी का सच शुक्रवार को खुलेआम सामने आ गया।

मामले का खुलासा तब हुआ, जब असली अनीता गुप्ता ने लोक शिकायत निवारण, बगहा में आवेदन देकर अपनी बड़ी बहन पर पहचान चोरी कर नौकरी हथियाने का गंभीर आरोप लगाया। शिकायत के बाद जांच आगे बढ़ी और सच्चाई पर से परदा हटने लगा। जांच को निर्णायक मोड़ देने के लिए भितहा थानाध्यक्ष अभिलाषा कुमार झा ने यूपी के कुशीनगर जिले के सेमरा हरदो गांव में ग्रामीणों की खुली बैठक बुलाई।

ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सचिव सहित दर्जनों ग्रामीणों ने पुलिस के सामने स्पष्ट गवाही दी कि स्कूल में पढ़ाने वाली महिला ‘मुन्नी’ है, जबकि ‘अनीता’ कोई और है। ग्रामीणों के बयान, पुराने कागजात और स्थानीय पहचान से जुड़े तथ्यों ने 20 साल पुराने झूठ को पूरी तरह उजागर कर दिया। लोक शिकायत निवारण के आदेश पर भितहा थाना में मुन्नी गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

शिक्षा विभाग ने उन्हें प्रधान शिक्षिका के पद से हटाकर शैक्षणिक कार्यों से अलग तो कर दिया है, लेकिन अब तक निलंबन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल उठ रहे हैं। यह भी सवाल उठता है कि इतने वर्षों तक पहचान सत्यापन कैसे नहीं हुआ और किसकी लापरवाही से सरकारी धन का दुरुपयोग होता रहा।थानाध्यक्ष के अनुसार, ग्रामीणों की गवाही और संकलित साक्ष्यों के बाद अब किसी तरह का संदेह नहीं बचा है। यह स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी, पहचान छुपाकर नौकरी करने और सरकारी धन के गबन का मामला है।











Be First to Comment