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बिहार में ज’हरीली श’राब से पिता की मौ’त, बेटे की आंखों की रोशनी गई

समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले में नए साल की शुरुआत के साथ ही जहरीली शराब ने एक परिवार को तबाह कर दिया है. मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के बखरी बुजुर्ग गांव में बालेश्वर साह (60 वर्ष) व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि उसके बेटे की दोनों आंखों की रौशनी चली गई.

बिहार में जहरीली शराब से मौत

मृतक के बेटे बबलू कुमार साह (30 वर्ष) ने बताया कि, एक जनवरी को गांव में ही शराब मिल रहा था, धंधेबाज बगल में बेच रहा था. मैंने सोचा पड़ोस का है तो अच्छा ही शराब मिलेगा. तीन बोतल खरीदी थी. एक बोतल पिताजी को दिया, पीने के बाद पिताजी की तबीयत बिगड़ने लगी.

‘मेरे दोनों आंखों की रोशनी चली गई’

बबलू कुमार साह ने आगे बताया कि, मेरे दोनों आंखों से दिखाई देना बंद हो गया था. इस बीच मेरे पिताजी की मौत हो गई. मैं उनकी लाश को कंधा भी नहीं दे सका. मेरी तबीयत फिर बिगड़ गई. मुझे घरवाले पटना ले गए. वहां डॉक्टरों ने कहा कि मेरी दोनों आंखों की रोशनी चली गई.

पीड़ित परिवार ने दर्ज काराई शिकायत

एक मौत के बाद पीड़ित परिवार ने मुसरीघरारी पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है. परिजनों ने आरोप लगाया कि अवैध शराब की सप्लाई से यह हादसा हुआ और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

घटनास्थल पर पहुंचे एसडीपीओ

सूचना मिलते ही सदर एसडीपीओ संजय कुमार पांडे और सदर एसडीओ दिलीप कुमार मौके पर पहुंचे. उन्होंने परिवार से मुलाकात की और स्थिति का आकलन किया. उन्होंने कहा कि शव का पोस्टमार्टम करवाया गया और विसरा को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा है. सूचना मिलने पर कार्रवाई की जा रही है.

पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट होंगे. फॉरेंसिक टीम को घटनास्थल पर बुलाया गया है, जहां साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से संकलन किया जा रहा है. पुलिस ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है.

जागरूकता अभियान की घोषणा

प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर जहरीली शराब के खतरे के प्रति लोगों को जागरूक करने का अभियान शुरू करने की योजना बनाई है. अंचलाधिकारी और अन्य अधिकारी ग्रामीणों को अवैध शराब के दुष्परिणामों से अवगत कराएंगे.

2016 से बिहार में शराबबंदी लागू
यह घटना ने बिहार की शराबबंदी व्यवस्था पर फिर से बहस छेड़ दी है. सरकार के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े हो गए हैं. नीतीश कुमार ने अप्रैल 2016 में ही शराबबंदी लाई थी, जिसके बाद से राज्य में शराब के निर्माण और व्यापार पर पूरी तर रोक लग गया था. हालांकि इसके बावजूद बिहार में जहरीली शराब से मौतें और शराब तस्करी जारी है.
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