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खाकी की बेरुखी और साइबर ठगों का जाल: 42 लाख की ठगी के बाद व्यवसायी ने दी जा’न, बिलख रही बेटियां

सासाराम:  सासाराम से एक झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जहां साइबर ठगी और पुलिसिया तंत्र की कथित बेरुखी से तंग आकर एक साड़ी व्यवसायी ने मौत को गले लगा लिया। दरीगांव थाना क्षेत्र के खैरा गांव निवासी अरुण कुमार सिंह ने अपने घर में जहर (सल्फास) खाकर खुदकुशी कर ली। बताया जाता है कि लोन दिलाने के नाम पर उनके साथ करीब 42 लाख रुपये की बड़ी धोखाधड़ी की गई थी, जिससे वे गहरे मानसिक तनाव में थे।

बेटी ने बताया क्या हुआ था

मृतक की पुत्री अनु कुमारी ने पिता के साथ हुई ठगी की दर्दनाक कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि ठगों ने पिता को फोन कर 10 लाख रुपये के लोन का लालच दिया था और शर्त रखी थी कि आधा पैसा पिता रखें और आधा उन्हें लौटा दें। इस जालसाजी को अंजाम देने के लिए अपराधियों ने उनसे एक नया मोबाइल भी खरीदवाया और बंधन बैंक के एक कथित कर्मी ने उनके फोन के साथ छेड़छाड़ कर गुप्त तरीके से करीब 45 लाख रुपये का लेन-देन कर लिया।

ठगी का पता चलने पर व्यवसायी अरुण सिंह ने न्याय के लिए सिस्टम के हर दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन उन्हें केवल निराशा मिली। परिजनों का आरोप है कि वे पहले स्थानीय दरीगांव थाना गए, लेकिन वहां कागजात लेने से मना कर दिया गया। इसके बाद वे डेहरी स्थित साइबर सेल और फिर रोहतास एसपी के पास भी गुहार लगाने पहुंचे, लेकिन आरोप है कि पुलिस के असहयोग और मामले में देरी ने उन्हें हताश कर दिया।

लोगों में आक्रोश

सांसद और स्थानीय प्रशासन के दावों के बीच, यह घटना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। व्यवसायी की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और इलाके में इस बात को लेकर आक्रोश है कि अगर समय रहते एसपी को दिए गए आवेदन पर कार्रवाई हुई होती, तो शायद अरुण सिंह आज जीवित होते। मृतक अपने पीछे दो बेटियों और परिवार को छोड़ गए हैं, जिनका सहारा अब छिन चुका है।

मौत के बाद एक्टिव हुई पुलिस

पुलिस प्रशासन ने अब मामले में सक्रियता दिखाई है। सासाराम के एसडीपीओ-1 दिलीप कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शव का पोस्टमार्टम करा लिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब मृतक के संबंधित बैंक खातों की पड़ताल कर रही है ताकि ठगी की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

फिलहाल, पुलिस का कहना है कि अनुसंधान में जो भी तकनीकी साक्ष्य और तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आरोपियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, परिजनों का स्पष्ट कहना है कि सिस्टम की संवेदनहीनता ने ही एक हंसते-खेलते परिवार के मुखिया को आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर किया है।

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