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देश का पहला, दुनिया का चौथा पावर म्यूजियम पटना में बदलेगी 50 साल पुराने खंडहर की किस्मत

पटना: पटना में प्रस्तावित ऊर्जा संग्रहालय (पावर म्यूजियम) को लेकर गुरुवार को महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सलाहकार और बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में परियोजना की प्रगति, समय सीमा और एजेंसी चयन की विस्तृत समीक्षा की गई.

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पटना में बनेगा देश का पहला ऊर्जा म्यूजियम

 बैठक का मुख्य उद्देश्य था कि देश के पहले ऊर्जा संग्रहालय को समय पर और आधुनिक मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सके. बैठक में बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा, पावर होल्डिंग कंपनी के मुख्य अभियंता (सिविल) मनमोहन कुमार, कार्यपालक अभियंता आशीष कुमार समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे.

वरिष्ठ अधिकारियों ने दी विस्तृत प्रस्तुति

इस उच्च स्तरीय बैठक में ऊर्जा विभाग के सचिव और अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के मनोज कुमार सिंह और एनबीपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक राहुल कुमार सहित कई अधिकारियों ने परियोजना का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया. अधिकारियों ने डिजाइन, निर्माण योजना, आवश्यक संसाधन और आगामी चरणों की जानकारी साझा की. अधिकारियों ने संग्रहालय के निर्माण और उसके तकनीकी पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की.

3 एकड़ जमीन पर तैयार होगा म्यूजियम

ऊर्जा संग्रहालय को पटना के करबिगहिया स्थित पुराने थर्मल पावर प्लांट परिसर की लगभग 3 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा. यह थर्मल प्लांट कई वर्षों से बंद पड़ा हुआ है. यह परियोजना बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी द्वारा क्रियान्वित की जाएगी.

देश का पहला, दुनिया का चौथा पावर म्यूजियम

आधुनिक तकनीक और ऐतिहासिक धरोहरों के मिश्रण के रूप में बनने वाला यह संग्रहालय भारत का पहला और दुनिया का चौथा समर्पित ऊर्जा संग्रहालय होगा. इस पूरे संग्रहालय को तैयार करने में लगभग 200 करोड़ रुपए की लागत आएगी.

ऊर्जा संग्रहालय का लक्ष्य शैक्षणिक शोध, ऊर्जा की विरासत के संरक्षण और तकनीकी पर्यटन को नई दिशा देना है. संग्रहालय में ऊर्जा उत्पादन के इतिहास से लेकर आधुनिक तकनीकों तक की पूरी यात्रा दिखाई जाएगी. खासकर बच्चों और युवाओं को ध्यान में रखते हुए इसे इंटरैक्टिव और डिजिटल रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि ऊर्जा से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को आसानी से समझा जा सके.

इंटरैक्टिव और आधुनिक प्रदर्शन

ऊर्जा संग्रहालय में पुराने उपकरणों से लेकर नवीनतम ऊर्जा तकनीक तक का अनोखा संग्रह होगा. यहां विजिटर्स को डीसी मॉडल, इंटरैक्टिव डिस्प्ले, डिजिटल पैनल, 3D मॉडल से ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया समझने का मौका मिलेगा. इसके अलावा पुराने जनरेटर, इंजन और बिजली उत्पादन से जुड़े दुर्लभ उपकरण भी प्रदर्शित किए जाएंगे.

ओपन थिएटर में 3D अनुभव

संग्रहालय परिसर में विशेष ओपन थिएटर भी बनाया जाएगा, जहां 3D तकनीक से बिजली उत्पादन की कहानी दिखाई जाएगी. इस थिएटर का उद्देश्य है कि लोग मनोरंजन के माध्यम से ऊर्जा के इतिहास और भविष्य की अवधारणा को बेहतर तरीके से समझ सकें. यह सुविधा बच्चों के लिए विशेष रूप से आकर्षक होगी.

शैक्षिक शोध के लिए भी बनेगा बड़ा मंच

संग्रहालय में एक शैक्षणिक केंद्र भी स्थापित किया जाएगा, जहां ऊर्जा से जुड़े शोध, वर्कशॉप और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. यह केंद्र छात्रों, शोधार्थियों और इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों को ऊर्जा के भविष्य पर काम करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करेगा.

देश के ऊर्जा इतिहास को सहेजने की दिशा में बड़ा कदम

पटना में बनने वाला यह ऊर्जा संग्रहालय न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा बल्कि यह देश के ऊर्जा इतिहास को सहेजने का भी एक बड़ा प्रयास है. बिहार सरकार का मानना है कि यह संग्रहालय राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी ऊर्जा शिक्षा और पर्यटन को नया आयाम देगा.

1930 में बना, 1934 में बंद

राजधानी पटना में साल 1930 में बिजली उत्पादन की शुरुआत को देखते हुए पावर हाउस का निर्माण शुरू हुआ था. हालांकि करबिगहिया, जक्कनपुर,न्यू मार्केट, कंकड़बाग और चिरैयाटांड़ समेत आसपास के इलाकों में बढ़ती आबादी और विस्तार के चलते 1934 में इसके संचालन में रोक लगा दी गई थी. उसके बाद से यह पावर हाउस बंद पड़ा था. साल 2019 में इस ऐतिहासिक परिसर को ऊर्जा संग्रहालय में बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली.

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