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बिहार में ट्रेन से 33 मोर सहित 40 पक्षियों के साथ बंगाल का तस्कर गिरफ्तार, शौचालय में छिपाया था तीन बड़ा प्लास्टिक बैग

रोहतास: बिहार के रोहतास जिले में डेहरी ऑन सोन रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने सोमवार को बड़ी सफलता हासिल की है. डीडीयू-गया रेलखंड पर चलने वाली ट्रेन में तस्करी कर लाए जा रहे 40 वन्य पक्षियों के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया. इसमें राष्ट्रीय पक्षी मोर भी शामिल हैं.

गुप्त सूचना पर चली कार्रवाई

आरपीएफ इंस्पेक्टर रामविलास राम के नेतृत्व में मिली गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई. सूचना थी कि कलिंग उत्कल एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर-12312 डाउन) से वन्य पक्षियों की तस्करी की जा रही है. ट्रेन के डेहरी ऑन सोन स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर पहुंचते ही टीम ने सर्च अभियान शुरू किया.

शौचालय में छिपाए थे तीन बड़े प्लास्टिक बैग

टीम को ट्रेन के एस-7 कोच के शौचालय में एक युवक संदिग्ध हालत में तीन बड़े प्लास्टिक बैग लिए दिखा. संदेह होने पर उसे हिरासत में लिया गया. पूछताछ में उसने अपना नाम 22 वर्षीय विक्रम मुखर्जी बताया है, जो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद गोपालपुर निवासी है.

33 मोर, 5 तीतर और हरियल कबूतर बरामद

आरपीएफ इंस्पेक्टर रामविलास राम ने बताया कि बैग खोलकर देखा गया तो उनमें जीवित हालत में 33 राष्ट्रीय पक्षी मोर, 5 तीतर और 2 हरियल कबूतर भरे हुए थे. सभी पक्षी संकट में थे और प्लास्टिक बैग में ठुसे होने से दम घुटने की स्थिति में थे. यह वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है.

टीम ने दिखाई मुस्तैदी

कार्रवाई में आरपीएफ इंस्पेक्टर रामविलास राम, उप निरीक्षक कुमार गौरव, सहायक उप निरीक्षक हरेराम कुमार, प्रधान आरक्षी बृजभूषण मिश्रा, प्रधान आरक्षी संतोष कुमार पासवान और अन्य शामिल रहे. पूरी टीम ने बेहतरीन समन्वय दिखाया और तस्कर को धर दबोचा.

तस्कर और पक्षी वन विभाग को सौंपे

आरपीएफ ने सभी 40 जीवित पक्षियों की विधिवत जब्ती सूची बनाई और आरोपी विक्रम मुखिया को गिरफ्तार कर लिया. आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद पक्षियों और तस्कर को आगे की कार्रवाई के लिए डेहरी ऑन सोन वन विभाग के हवाले कर दिया गया.

Wildlife smuggler in Rohtas

हाल के दिनों की सबसे बड़ी सफलता

आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार हाल के दिनों में वन्य पक्षियों की तस्करी करने वाले गिरोह के खिलाफ यह सबसे बड़ी कार्रवाई है. रेलवे स्टेशनों को तस्करी का रूट बनाए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थी. दरअसल वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 48 तथा 49 जंगली जानवरों से निर्मित सामान या इनके किसी भी अंग के व्यापार या वाणिज्य पर प्रतिबंध है. ऐसे अपराध में सात साल की सजा का प्रावधान है.

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