बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक समीकरणों का रंग गहराता जा रहा है. हर दल अपनी रणनीति को नई दिशा देने में जुटा है. इसी क्रम में महागठबंधन ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला.

महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार और वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया गया. यह फैसला न सिर्फ गठबंधन की एकजुटता का प्रतीक बताया जा रहा है, बल्कि इसे सामाजिक समीकरणों को साधने की बड़ी कोशिश भी माना जा रहा है.



डिप्टी सीएम पद की मांग पर अड़े थे मुकेश सहनी
पिछले कई हफ्तों से मुकेश सहनी खुले तौर पर डिप्टी सीएम पद की मांग कर रहे थे. उनके समर्थक लगातार दबाव बना रहे थे कि मल्लाह समाज को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व दिया जाए.



हालांकि, महागठबंधन की ओर से अब तक इस पर चुप्पी थी. लेकिन जब चुनावी माहौल तेज हुआ और भीतरघात व नाराजगी की खबरें आने लगीं, तब महागठबंधन ने आखिरी वक्त में यह फैसला लेकर सियासी संतुलन बनाने की कोशिश की.


सूत्रों के अनुसार, बीते कुछ दिनों से तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी के बीच लगातार बातचीत हो रही थी. सहनी निषाद समाज के सबसे प्रभावशाली चेहरे हैं और उत्तर बिहार के कई जिलों- दरभंगा, मधुबनी, सीवान और मुजफ्फरपुर बेल्ट में उनका ठोस जनाधार माना जाता है. बिहार में आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मल्लाह या निषाद समुदाय की आबादी करीब 34,10,093 है. जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 2.6 प्रतिशत हिस्सा है.

















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