खरमास की शुरुआत गुरुवार 14 मार्च से हो गई है। इससे अगले एक महीने तक मांगलिक कार्य नहीं होंगे। सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने के साथ ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी। खरमास के दौरान पूजा-पाठ और हवन तो हो सकते हैं लेकिन किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाने चाहिए। पंचांग के अनुसार, भगवान सूर्य कुंभ राशि से निकलकर 14 मार्च की रात 12:24 बजे मीन राशि में प्रवेश कर गए हैं। सूर्य मीन राशि में 13 अप्रैल की रात 9:03 बजे तक रहेंगे। इसके बाद वह मेष राशि में प्रवेश करेंगे। 14 अप्रैल से मांगलिक कार्यक्रम हो सकेंगे।


धार्मिक मान्यता है कि सूर्य जब गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो वह अपने गुरु की सेवा में समय व्यतीत करते हैं। इस दौरान सूर्यदेव का प्रभाव कम हो जाता है। इसलिए खरमास महीने में शुभ कार्यों के आयोजन की मनाही होती है। इससे जुड़ी कथा के अनुसार इस महीने में सूर्य नारायण अपने अश्वों को आराम करने के लिए छोड़ देते हैं जबकि संसार में ऊर्जा का संचालन सामान्य रखने के लिए खर की सवारी करते हैं जिससे उनकी गति धीमी हो जाती है। मान्यता है कि इसी कारण इस महीने को खरमास कहते हैं।

- दान-पुण्य करें।
- जप-तप करें।
- इस माह मंत्र जप का विशेष महत्व होता है।
- इस माह तीर्थ यात्रा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
- नियमित सूर्यदेव को जल-अर्घ्य दें और उनकी पूजा-अर्चना करें।
- खरमास में ब्राह्मण, गाय, गुरु और साधु-संतों की सेवा करनी चाहिए।
अगले माह 18 से 22 के अप्रैल के बीच पांच शुभ लग्न मुहूर्त का योग है। उसके बाद आगे जुलाई में शुक्र ग्रह के उदय के बाद फिर से मांगलिक कार्य आरंभ होंगे। जुलाई में आठ दिन विवाह का शुभ मुहूर्त है। इसके बाद अगस्त-सितंबर में कोई मुहूर्त नहीं बन रहा है। अक्टूबर में छह दिन और नवंबर में नौ दिन विवाह का शुभ मुहूर्त है।












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