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मुजफ्फरपुर के एईएस पीड़ित बच्चों को दी जाएगी विटामीन कॉकटेल की खुराक

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के सलाहकार व एम्स जोधपुर के शिशुरोग विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार सिंह एईएस प्रभावित गांव में जाकर वहां बच्चों के रहन-सहन का अध्ययन किया। अध्ययन करने के बाद एसकेएमसीएच के चिकित्सकों की टीम से बातचीत करने के बाद रविवार को वापस हो गए। उनके सुझाव पर इस बार एईएस इलाज प्रोटोकॉल में विटामीन कॉकटेल को शामिल किया गया है। एसकेएमसीएच उपाधीक्षक व शिशु रोग विभागाध्यक्ष डा.गोपाल शंकर सहनी ने बताया कि इस साल 2021 के लिए जो इलाज प्रोटोकॉल यानी एसओपी जारी हुआ है। उसमें विटामीन कॉकटेल की खुराक इलाजरत बच्चों को मिलेगी। यह मल्टीविटमीन की खुराक होगी जो इंजेक्शन, सीरप व टेबलेट के रूप में उपलब्ध होगा।

जमालबाद पहुंची टीम, देखा रहन-सहन

शोध को आए डा.अरूण कुमार सिंह मुशहरी प्रखंड के जमालाबाद पहुंचे। यहां 2019 में एक बच्चे की मौत एईएस से हुई थी। केयर इंडिया के जिला समन्वयक सौरभ तिवारी ने शोध टीम का सहयोग किया। डा.सिंह ने बताय कि वह उस गांव में बच्चे किस तरह के मकान में रहते है। उनके खान-पान की क्या व्यवस्था है, घर के अंदर कितना तापमान रहता है। उस गांव में किस तरह का रहन-सहन है इसको देखे है। वह जब बच्चे बीमार होकर आने लगेंगे तो उस समय एक बार आयेंगे। बीमारी के प्रकोप से पहले व उसके बाद की हालाता पर वह पूरी नजर रखेंगे। डा. सिंह ने कहा कि अब तक कोई ठोस कारण सामने नही है। लेकिन जोा बच्चे ेबीमार हुए उसमें ज्यादा कुपोषित रहे है। उसके बाद बीमारी के कारण उनका माइटोकांड्रिया डैमेज हो रहा है।

एईएस का प्रकोप 1995 से मुजफ्फरपुर व आसपास के जिलों में है. इससे गर्मी में हर साल बच्चों की जान जाती है. एईएस पीडि़त बच्चों के माइटोकांड्रिया पर शोध किया जा रहा है.

बीमारी के यह होते लक्षण

एईएस से पीड़ित बच्चों में बुखार के अचानक शुरू होता है और शरीर में ऐंठन होती है. उसके बाद मूंह से झाग निकलनेे लगाता है. अगर समय पर इलाज हुआ तो ठीक वरना बच्चे की मौत हो जाती है.

मासूम बच्चों में आ रही माइटोकॉन्ड्रिया की समस्या

बीमार बच्चों में ग्लूकोज की कमी और गर्मी के बीच विशेषज्ञों को आशंका है कि बच्चों में कुछ आनुवंशिकी कारणों से भी यह बीमारी हो रही है। माइटोकॉन्ड्रिया की समस्या दो एक साल तक के बच्चों में अमूमन नहीं मिलती है, मगर एईएस के केस में लगभग सौ ऐसे बच्चे आये हैं जो इस समस्या के शिकार थे। 2819 में पहली बार इलाज के दौरान बच्चों के सभी ऑर्गेन की पैथोलॉजि जांच भी की गयी है। इसी में माइटोकॉन्ड्रिया जैसी कॉमन समस्या सामने आयी।

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