कोरोना काल में बि’हार के तमा’म परंपरा’गत विश्ववि’द्यालयों में नामां’कन बुरी तरह प्रभा’वित हुआ है। लंबे सम’य तक बंदी के का’रण एक तो रा’ज्य के पांच सौ से अधिक अंगी’भूत व सम्’बद्ध कॉलेजों में नामां’कन प्रक्रिया देर से आरंभ हुई, दूसरे ऑन’लाइन आवेद’न में कहीं नेट तो कहीं जान’कारी की कमी आड़े आई। ऊपर से दा’खिला प्रक्रिया से जुड़े शिक्षकों के कॉलेज मुख्या’लय से गैरमौ’जूदगी और उनके टेक्नो’फ्रेंडली नहीं होने से भी व्या’पक असर पड़ा। नामांकन की सूचना भी छात्रों तक ठीक से नहीं पहुंची। कोरोना संक्र’मण के डर से भी हजारों विद्या’र्थियों का रुख दूरस्थ शि’क्षा की ओर होने से विश्वविद्या’लय नामांकन के लिए हांफ रहे हैं। पटना, पाटलिपुत्र, आरा, छ’परा जैसे कुछ विवि को छोड़ दें तो नामां’कन का हाल बेहाल है। हजा’रों सीटें खाली हैं।
जब हमने ने सभी 13 पारंप’रिक विश्वविद्या’लयों में स्ना’तक (यूजी), स्नातको’त्तर (पीजी) व व्याव’सायिक कोर्सों में नामांकन का जाय’जा लिया तो स्थिति दय’नीय दिखी। कहीं एक चौथाई, कहीं एक तिहाई तो कहीं आधी ही सीटों पर ना’मांकन हुआ है। ज्या’दातर विश्वविद्या’लयों में पीजी में नामां’कन भी आरंभ नहीं हुआ है। यही हाल रहा तो बिहार की उच्च’शिक्षा में सकल ना’मांकन अनुपा’त (जीईआर) का और गिरना तय है। बि’हार का जीईआर 13.6, जब’कि राष्ट्री’य औसत 26 है। 2035 तक जीईआर को 50 फीसदी करने का प’हाड़ सरीखा लक्ष्य बिहार के सा’मने मुंह बाये ख’ड़ा है।

कहीं आठ तो कहीं सा’त लिस्ट हो चुके हैं जारी
पीयू, पीपीयू, एमएमएच अरबी फारसी, मगध, एलएनएमयू, केएसडी, वीकेवीएस, टीएमबी, बीएनमंडल, बीआरए बिहार, मुंगेर विवि, पू’र्णिया विवि और जेपी विवि छपरा के नामां’कन की पड़ताल की। पट’ना विवि में आठ बार मेरिट लि’स्ट जारी हो चुके हैं, लेकिन सी’टें खाली हैं। बीआरए बिहार विवि में स्ना’तक में सात मेरिट लि’स्ट जारी होने के बाद ही 37 हजार सीटें खाली ही हैं। तिलकामांझी भाग’लपुर व पू’र्णिया विवि में आधी सीटों पर ही दाखिला हुआ है। मग’ध विवि में 47 हजार 200 सीटों पर नामां’कन नहीं हुआ है।
पड़ेगा दीर्घकाली’न असर
दिसम्बर तक नामां’कन की प्रक्रिया आधी भी नहीं होने का असर दीर्घ’कालीन होगा। एक तो मौजूदा सत्र विलं’बित होगा, दूसरा इसका बड़ा प्र’भाव अगले सत्र पर पड़ेगा। वैसे भी आधा दर्जन विवि ऐसे हैं, जहां सत्र पहले से ही दो-तीन साल विलं’बित चल रहे हैं। राज्यपाल ने विश्वविद्या’लयों को लंबित प’रीक्षाएं कराने के साथ जनवरी में दी’क्षांत स’मारोह का आयोजन करने को कहा है, लेकिन यह संभव नहीं दिख रहा। उल्ले’खनीय है कि नामांक’न, परीक्षा और परि’णाम प्रका’शन का दायित्व विश्ववि’द्यालयों का है। इसके लिए वे सक्ष’म हैं।
उच्च शिक्षा निदे’शक डॉ. रेखा कुमारी ने बताया कि नामांकन को लेकर विश्व’विद्यालय स्वतंत्र इकाई हैं। ऑन’लाइन प्रक्रि’या में यदि प’रेशानी हो रही है और सीटें खाली हैं तो रा’जभवन से निर्देश प्राप्त’कर उन्हें ऑफला’इन प्रक्रिया अपनाकर नामां’कन कराना चाहिए।









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