बिहार में शहरी’करण अब रफ्ता’र पक’ड़ेगा। मुख्’यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्ष’ता में शनिवा’र को हुई राज्य कैबि’नेट की विशे’ष बैठक में 111 नए श’हरी निका’यों को मंजू’री दे दी गई। इनमें 103 नई नगर पंचा’यतें और आठ ऐसी नगर परिष’द शामि’ल हैं, जिन्हें सीधे ग्राम पंचा’यत से परिषद बनाया गया है। वहीं, सा’साराम, मोति’हारी, बेतिया, मधुबनी और समस्’तीपुर नगर परिषद को अपग्रे’ड कर नगर नि’गम बनाया गया है। 32 नगर पंचा’यतों को अप’ग्रेड कर नगर परिषद का दर्जा दिया गया है। जब’कि नगर निगम बिहा’र शरी’फ और 11 नगर परिषद का क्षेत्र विस्’तार किया गया है। इन इला’कों में अब वि’कास की गति तेज होगी।
राज्य कै’बिनेट के फैसले की जा’नकारी देते हुए नगर विकास एवं आ’वास सचिव आनंद किशोर ने बताया कि नए निका’यों के गठन की जा’नकारी मीडिया सहित वि’भिन्न माध्यमों से लोगों को दी जा’एगी। अगर किसी को आप’त्ति होगी तो वो इसे लिखित में संबं’धित जि’ला पदाधिकारी और प्रमंड’लीय आयुक्त को देंगे। जिलों के माध्’यम से यह आप’त्तियां विभाग में आएंगी। आप’त्तियों का निरा’करण करने के बाद अंतिम रूप से नए नि’कायों के गठन की अधिसू’चना जारी कर दी जाए’गी। सारी प्रक्रि’या एक माह में पूरी होगी।
राज्य में होगा शह’री इला’कों का वि’स्तार
नए निका’यों के गठन से कई लाभ होंगे। वर्ष 2011 की जन’गणना के अनु’सार बिहार का शहरी’करण महज 11.27 प्रति’शत है, जो देश में स’बसे कम है। राष्ट्रीय औसत 31.16 प्रति’शत है। नए निकाय बनने से राज्य में शह’रीकरण 18 प्रति’शत के क’रीब हो जाएगा। निकाय बनने पर राज्य में शहरी इला’कों का विस्तार होगा। उन इ’लाकों में विका’स कार्यों में तेजी आ’एगी। केंद्र की विभिन्न योज’नाओं में शहरों को ही फंडिंग किए जाने का प्रावधा’न है। इनका लाभ भी नि’काय गठन पर उन इला’कों को मिल सकेगा।
तेजी से विका’स का लो’गों को होगा लाभ
शहरों को ग्रोथ इंजन यानि वि’कास का वाह’क माना जाता है। नए श’हरी नि’काय बनने के बाद राज्य के वि’भिन्न क्षेत्रों में विकास की गति और तेज होगी। संबंधित क्षेत्रों में सुनियो’जित ढंग से विका’स होगा। नागरिक सुवि’धाओं ब’ढ़ेंगी। पानी, बिजली, सड़क, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज, मशीनों के ज’रिए स’फाई, पार्क सहित अन्य सा’मुदायिक सुविधाओं की व्य’वस्था बेहतर हो जाएगी। ऐसे इला’के में रोजगार के नए अवस’र पैदा होंगे। जमीनों के कीम’तों में भी वृद्धि होगी। वित्त आयोग से श’हरी नि’कायों को गांव की अपेक्षा ज्’यादा अंशदान मिलने लगेगा। राज्’यांश और केंद्रांश की भी हिस्से’दारी मिलने लगेगी।
मानकों में बद’लाव से साफ हुई नि’काय गठन की राह
राज्य में शहरी’करण के पुराने मा’नक के अनु’सार शहरी निकाय गठन के लिए कुल जनसं’ख्या की 75 प्रति’शत आबा’दी खेती पर निर्भर न’हीं होनी चाहिए थी। दरअस’ल वर्ष 2011 की जनग’णना में कुल जन’संख्या का कृषि और गैर कृषि आ’धारित आ’बादी का अलग आं’कड़ा उप’लब्ध नहीं है। इसी के चलते राज्य कै’बिनेट ने इस साल छह मई को शह’रीकरण के मानकों में बदला’व कर नए नि’काय गठन का रा’स्ता साफ कर दिया था। नए बद’लाव में अब का’र्यशील जन’संख्या की 50 प्रतिशत से अधि’क आ’बादी खेती पर निर्भर नहीं होनी चाहि’ए। यानि सौ में से 51 लोग खे’ती न करते हों।

बार-बार स’दन में उठता था माम’ला
यह माम’ला बार-बार विधा’नसभा और विधा’न प’रिषद में उठता रहा है। तब स’रकार की ओर से मंत्री कोर्ट से जुड़ा मा’मला बताते रहे हैं। राज्य सर’कार ने पूर्व में गठित हरनौत व बि’हटा नगर पंचायत के माम’लों में हाई’कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इसी’लिए मान’कों में बद’लाव जरूरी था।









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