मुजफ्फरपुर के बहलखाना रोड स्थित नगर निगम कार्यालय के बाहर सैकड़ों नगर निगम कर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी बिहार लोकल बॉडीज इम्प्लॉइज फेडरेशन और बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, संविदा और एनजीओ कर्मियों को नियमित करने के बजाय उन्हें एनजीओ और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के हवाले करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने साफ कहा कि 15–20 वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को किसी भी कीमत पर एनजीओ के अधीन नहीं जाने दिया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में दैनिक वेतनभोगी, संविदा और एनजीओ कर्मियों का नियमितीकरण, सरकारी कर्मचारी का दर्जा, सेवा सुरक्षा, सम्मानजनक वेतन, एसीपी/एमएसीपी का लाभ, बकाया भुगतान तथा ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करना शामिल है।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि एनजीओ के माध्यम से काम करने वाले कर्मचारियों का आर्थिक शोषण हो रहा है। कई कर्मचारियों का पीएफ समय पर जमा नहीं किया जाता और मात्र 12,400 रुपये मासिक वेतन में परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल है। उनका कहना है कि वर्षों से नगर निगम की सेवा करने वाले कर्मचारियों को सम्मान और रोजगार की सुरक्षा मिलनी चाहिए।

संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो हड़ताल और आंदोलन पूरे बिहार में और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ मुजफ्फरपुर की नहीं, बल्कि बिहार के हजारों नगर निकाय कर्मियों के अधिकार और भविष्य की लड़ाई है।









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